दुमका : कहने को दुमका उपराजधानी है, लेकिन बुनियादी सुविधाओं के मामले में यह राज्य के कई दूसरे जिलों से भी पिछड़ा हुआ है. सबसे बुरी स्थिति तो यहां चिकित्सा व्यवस्था की है, जहां एक अदद सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पीटल नहीं है. मेडिकल कॉलेज तक नहीं बना है.
डायग्नोस्टिक सेंटर है, लेकिन उसमें जो सेवायें मिलनी चाहिए, वह लोगों को नहीं मिल रही. चिकित्सकों की कमी से यह जिला हमेशा ही प्रभावित रहा है. अभी भी चिकित्सकों के 51 पद खाली पड़े हुए हैं. पूरे जिले की बात करें, तो यहां 181 डॉक्टरों की पोस्टिंग होनी चाहिए थी. यह आकलन भी दशक भर पहले का है. इस अंतराल में आबादी बढ़ी, अस्पताल बढ़े, लेकिन डॉक्टरों की संख्या घटती गयी.
सदर अस्पताल में नहीं है गायनोक्लॉजिस्ट
सदर अस्पताल में लंबे समय से गायनोक्लाजिस्ट का पद खाली है. एक भी सर्जन और पैथोलोजिस्ट इस अस्पताल में नहीं हैं. डॉक्टर के यहां कुल 18 पद सृजित हैं. इनमें से तीन पद खाली पड़े हुए हैं.
अस्पताल के प्रबंधन का दायित्व स्वास्थ्य उपाधीक्षक पर होता है. लेकिन यहां स्वास्थ्य उपाधीक्षक का पद भी खाली है. स्वास्थ्य उपाधीक्षक के पद पर पूर्व में डॉ सुरेश कुमार पदस्थापित थे. उन्हें सिविल सर्जन बनाये जाने के बाद से ही यह पद खाली है.
