दुमका : उपराजधानी दुमका के जोहार में द्वितीय संस्था के बैनर तले आयोजित दो दिवसीय संताली साहित्य सम्मेलन रविवार को संपन्न हो गया. इस सम्मेलन में संताली साहित्यकारों, रचनाकारों, शिक्षक, बुद्धिजीवियों ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया और संताल आदिवासी समाज के विकास में साहित्य के साथ-साथ लेखक, शोधार्थियों एवं सांस्कृतिक कलाकारों की भूमिका पर चर्चा की गयी. इसके अलावा संताली साहित्य में आत्मकथा लेखन पर विशेष बल दिया गया.
समापन सत्र में समन्वयक डॉ आइवी इमोजिनी हांसदा, दुखीन सोरेन, इनोसेंट सोरेन, साहेबराय टुडू, गोकुल हांसदा, संताली साहित्यकार चुंडा सोरेन ‘सिपाही’, एसकेएमयू की पूर्व प्रोवीसी डॉ प्रमोदिनी हांसदा, युवा साहित्यकार महेंद्र हांसदा ‘बेपारी’, सुदर मनोज हेंब्रम आदि ने अपने विचारों को रखा तथा संताली साहित्य को और समृद्ध बनाने, लेखन कार्य को बढ़ाने पर जोर दिया.
