न चिकित्सक हैं, न ही दवा

दुमका : आयुष के तहत दुमका जिले में संचालित औषधालयों की स्थिति बेहद ही खराब है. तीन साल से एक भी दवा की आपूर्ति जिले के तेरह औषधालयों में नहीं की गयी है. बिन दवा के चिकित्सक मरीजों को दवा नहीं दे पा रहे हैं. चंद बोतल दवा है, तो वह भी केवल होमियोपैथी की, […]

दुमका : आयुष के तहत दुमका जिले में संचालित औषधालयों की स्थिति बेहद ही खराब है. तीन साल से एक भी दवा की आपूर्ति जिले के तेरह औषधालयों में नहीं की गयी है. बिन दवा के चिकित्सक मरीजों को दवा नहीं दे पा रहे हैं.
चंद बोतल दवा है, तो वह भी केवल होमियोपैथी की, जो कि सिर्फ मुख्यालय में संचालित संयुक्त औषधालय में ही है. लिहाजा मरीजों का इलाज भी केवल यहीं से हो पाता है.
ग्रामीण क्षेत्रों में 12 औषधालय, 8 में चिकित्सक नहीं दुमका जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में 1980 के दशक में दर्जन भर औषधालय खोले गये थे.
इनमें आठ आयुर्वेदिक औषधालय, तीन होमियोपैथिक औषधालय एवंएक यूनानी औषधालय हैं. क्रमश: कुरुवा, कठलिया, अमरपुर, रानीग्राम, जामा, शिकारीपाड़ा, काठीकुंड एवं गोपीकांदर में आयुर्वेदिक औषधालय है. चिकित्सक के अभाव में कुरुवा, कठलिया, अमरपुर, रानीग्राम एवं गोपीकांदर का औषधालय महज नाम का ही है.
यही हाल रामगढ़ व शिकारीपाड़ा में होमियोपैथिक चिकित्सालय एवं हंसडीहा में यूनानी औषधालय का है.

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