Dhanbad News : विश्व को पर्यावरण परिवर्तन के खतरों से बचा सकने की क्षमता आदिवासी संस्कृति में : प्रो नीतिशा

Dhanbad News : विश्व को पर्यावरण परिवर्तन के खतरों से बचा सकने की क्षमता आदिवासी संस्कृति में : प्रो नीतिशा

Dhanbad News : सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ बिहार, गया के अंग्रेज़ी एवं विदेशी भाषा विभाग द्वारा 7-8 अगस्त को आयोजित आइसीएसएसआर प्रायोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में बीएसके कॉलेज मैथन के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो नीतिशा खलखो ने भाग लिया. श्रीमती खलको ने संगोष्ठी में आदिवासी स्वायत्तता के सवाल और आदिवासियों की पारंपरिक संस्थाएं विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया. यह संगोष्ठी भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती की स्मृति में आयोजित की गयी थी. श्रीमती खलखो ने अपने संबोधन में कहा कि आदिवासी समाज की स्वायत्तता उसके सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक विकास के लिए अनिवार्य है. उन्होंने आदिवासियों की पारंपरिक संस्थाओं जैसे धूमकुड़िया, पड़हा व्यवस्था, पारंपरिक न्याय प्रणाली और सांस्कृतिक आयोजनों की भूमिका को रेखांकित किया. कहा कि ये संस्थाएं न केवल सामुदायिक एकजुटता बनाए रखती हैं, बल्कि आत्म निर्णय के अधिकार को भी सशक्त करती है. आदिवासियत ही वह दर्शन है, जो विश्व को पर्यावरण परिवर्तन के खतरों से बचा सकता है. संगोष्ठी में देशभर से 14 राज्यों के आये शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों ने आदिवासी संस्कृति, भाषा और पहचान पर अपने विचार रखे. आयोजन के प्रमुख आयोजक डॉ अभय लियोनार्ड एक्का, उद्घाटन सत्र में नेशनल शेड्यूल ट्राइबल कमीशन की मेंबर डॉ आशा लकड़ा व समापन सत्र में साहित्य अकादमी के एग्जीक्यूटिव मेंबर व आदिवासी साहित्यकार महादेव टोप्पो शामिल थे.

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