इन्द्रजीत पासवान की रिपोर्ट
Dhanbad News: टाटा स्टील कंपनी के झरिया डिविजन के अंतर्गत संचालित भेलाटांड कोलियरी में दैनिक ठेका मजदूरों ने न्यूनतम मजदूरी, अन्य सुविधाओं और हक-हकूक की मांग को लेकर मंगलवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं. इस हड़ताल के कारण इसका असर उत्पादन कार्य पर भी पड़ा है. जिससे कंपनी को प्रतिदिन लाखों रुपये का नुकसान होने का अनुमान लगाया जा रहा है. हड़ताली मजदूर सुबह से भेलाटांड दुर्गा मंदिर मैदान पर एकत्र हुए. यहां से उन्होंने नारे लगाते हुए कंपनी के मुख्य गेट तक मार्च निकाला.
मुख्य गेट पर जोरदार प्रदर्शन, मजदूरों ने लगाए नारे
मार्च के दौरान उन्होंने न्यूनतम मजदूरी दो, हक मारो मत, ठेका मजदूर एकता जिंदाबाद, संविदा प्रथा बंद करो जैसे जोरदार नारे लगाए. मुख्य गेट पर पहुंचकर उन्होंने जोरदार प्रदर्शन किया और मांगों को तुरंत लागू करने की चेतावनी दी. प्रदर्शन के बाद वे उसी मार्ग से दुर्गा मंदिर मैदान लौट आए, जहां उन्होंने बैठक कर आगे की रणनीति पर चर्चा की.
मजदूरों ने लगाए गंभीर आरोप
हड़ताल का नेतृत्व कर रहे आनंद गोप ने कहा हम मजदूरों को सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी संवेदक द्वारा नहीं दी जा रही है. जबकि केंद्र और राज्य सरकार की स्पष्ट गाइडलाइन है कि सभी संवेदकों को न्यूनतम मजदूरी अनिवार्य रूप से भुगतान करनी होगी. हम लोग सरकारी मजदूरों की तरह ही खदान के अंदर उत्पादन से जुड़े जोखिम भरे कार्य करते हैं, लेकिन हमारे हक और अधिकारों को लगातार लूटा जा रहा है. उन्होंने आगे कहा कि दैनिक ठेका मजदूरों को कोई सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं. न तो मेडिकल सुविधा, न ही सुरक्षा उपकरण ठीक से उपलब्ध कराए जा रहे हैं. छुट्टी, ओवरटाइम, पीएफ, ईएसआई जैसी बुनियादी सुविधाओं से भी वे वंचित हैं. आनंद गोप ने आरोप लगाया कि ठेकेदार मुनाफा कमाने के चक्कर में मजदूरों का शोषण कर रहे हैं, जबकि टाटा स्टील जैसी बड़ी कंपनी को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए.
हड़ताल का प्रभाव और स्थिति
एक साथ सैकड़ों दैनिक मजदूरों के हड़ताल पर चले जाने से कोलियरी में कोयला उत्पादन पर भी इसका असर पड़ा है. जानकारी के अनुसार, प्रतिदिन कई लाख रुपये का नुकसान होने का बाते कही जा रही है. कोलियरी प्रबंधन ने अभी तक औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि बातचीत का प्रयास किया जा रहा है. ठेका मजदूरों की समस्याएं लंबे समय से चली आ रही हैं. पहले भी कई बार ऐसी हड़तालें हो चुकी हैं, लेकिन मांगों के समाधान में देरी के कारण असंतोष बढ़ता जा रहा है. जल्द बातचीत नहीं हुई तो हड़ताल और तेज हो सकती है. स्थानीय प्रशासन और श्रम विभाग इस मामले पर नजर रखे हुए है. दोनों पक्षों के बीच वार्ता शुरू होने की उम्मीद है, जिससे जल्द से जल्द समस्या का समाधान निकाला जा सके.
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