धनबाद. शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (एसएनएमएमसीएच) की इमरजेंसी में वेंटिलेटर बंद होने के बाद गिरिडीह के डुमरी निवासी मरीज की मौत के मामले में अस्पताल प्रबंधन ने जांच शुरू कर दी है. मरीज के परिजनों द्वारा लगाये गये आरोपों के बाद अधीक्षक डॉ डीके गिंदौरिया के निर्देश पर चार सदस्यीय जांच कमेटी गठित की गयी है.
कमेटी में एनेस्थीसिया विभाग के डॉ विनित और डॉ मृत्युंजय, मेडिसिन विभाग की डॉ पूर्णिमा केरकेट्टा तथा सर्जरी विभाग के डॉ जितेंद्र कुमार रंजन को शामिल किया गया है.
घटना के बाद एहतियातन इमरजेंसी में लगे सभी छह वेंटिलेटरों के इस्तेमाल पर अगले आदेश तक रोक लगा दी गयी है. अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, जांच कमेटी की रिपोर्ट और सभी वेंटिलेटरों की तकनीकी जांच पूरी होने के बाद ही इनके इस्तेमाल को लेकर आगे निर्णय लिया जायेगा.
प्रारंभिक जांच में बैकअप सिस्टम में खराबी
मामले की प्रारंभिक जांच में इमरजेंसी के छह वेंटिलेटरों में से कई के बैकअप सिस्टम में खराबी मिलने की बात सामने आयी है. बिजली आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में वेंटिलेटर का बैकअप सिस्टम महत्वपूर्ण होता है. ऐसे में बैकअप सिस्टम में खराबी सामने आने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने सभी वेंटिलेटरों की तकनीकी जांच कराने का निर्णय लिया है.
जांच कमेटी घटना के दौरान बिजली आपूर्ति, जनरेटर के संचालन, वेंटिलेटरों के बैकअप सिस्टम और मरीज की चिकित्सीय स्थिति समेत अन्य पहलुओं की पड़ताल करेगी. कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जायेगी.
भर्ती मरीजों के लिए वेंटिलेटर सेवा जारी
अस्पताल प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि वेंटिलेटर सेवा पूरी तरह बंद नहीं की गयी है. पहले से भर्ती मरीज अथवा सर्जरी के बाद किसी मरीज को वेंटिलेटर की जरूरत पड़ती है, तो उन्हें यह सुविधा उपलब्ध करायी जायेगी.
ये भी पढ़ें: टॉर्च की रोशनी में चल रहा SIR का काम, निरसा प्रखंड कार्यालय में बिजली संकट से कर्मी और लोग परेशान
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, गंभीर और जरूरतमंद भर्ती मरीजों के लिए वेंटिलेटर की सुविधा जारी रहेगी.
जांच रिपोर्ट से स्पष्ट होगी मौत की वजह
रविवार की घटना के बाद मरीज के परिजनों ने आरोप लगाया था कि वेंटिलेटर बंद होने के कारण मरीज की मौत हुई. अब जांच कमेटी घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करेगी.
कमेटी की रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बिजली आपूर्ति या जनरेटर से जुड़ी समस्या के कारण वेंटिलेटर का संचालन प्रभावित हुआ था या मरीज की मौत के पीछे कोई अन्य चिकित्सीय कारण था.
