धनबाद के इस अस्पताल में इमरजेंसी से OPD तक में नहीं हो रही ECG, रोजाना 400 मरीजों की होती थी जांच

SNMMCH Dhanbad: धनबाद के शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (एसएनएमएमसीएच) में रोल खत्म होने से इमरजेंसी से लेकर ओपीडी तक मरीजों की इसीजी जांच बंद हो गयी है. वर्तमान में इमरजेंसी में जैसे-तैसे रोल का इंतजाम कर अति आवश्यक मरीजों को ही इसीजी का लाभ दिया जा रहा है. अस्पताल प्रबंधन के अनुसार इसीजी रोल के लिए टेंडर के जरिए एजेंसी को रोल सप्लाई का ऑर्डर दिया गया है.

SNMMCH Dhanbad: धनबाद-शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (एसएनएमएमसीएच) में इन दिनों मरीजों के लिए इसीजी सेवा बंद कर दी गयी है. अस्पताल के कर्मियों के अनुसार इसीजी मशीन में डाले जाने वाला कागज का रोल खत्म होने से सेवा बंद है. ऐसे में इमरजेंसी से लेकर ओपीडी व विभिन्न विभागों में पहुंचने वाले मरीजों को इसीजी सेवा का लाभ नहीं मिल पा रहा है. यह स्थिति पिछले कई दिनों से चल रही है. वर्तमान में इमरजेंसी में जैसे-तैसे रोल का इंतजाम कर अति आवश्यक मरीजों को ही इसीजी का लाभ दिया जा रहा है.

मरीजों की नहीं हो रही जांच

अस्पताल प्रबंधन के अनुसार इसीजी रोल के लिए टेंडर के जरिए एजेंसी को रोल सप्लाई का ऑर्डर दिया गया है. वर्तमान में मुख्यमंत्री अस्पताल संचालन व रख रखाव की योजना से मिले पैसों से रोल खरीद कर इमरजेंसी में काम चलाया जा रहा है. हालांकि, इमरजेंसी में मरीजों की संख्या ज्यादा और सीमित इसीजी रोल की उपलब्धता की वजह से कई मरीजों की जांच नहीं हो रही है.

हर दिन 400 से ज्यादा मरीजों की होती थी इसीजी


एसएनएमएमसीएच में इसरजेंसी से लेकर ओपीडी व विभिन्न विभागों में औसतन 400 से ज्यादा मरीजों की इसीजी होती है. वर्तमान में रोल के अभाव में यह संख्या 20 से नीचे पहुंच गयी हैं. ओपीडी के मरीजों को इसीजी के लिए बाहरी केंद्र जाना पड़ रहा है. वहीं इंडोर के कई मरीजों की इसीजी टाल दी गयी है.

एसआइसीयू में अंदाजा से हो रही रक्तचाप की मॉनीटरिंग

एसएनएमएमसीएच की इमरजेंसी में एसआइसीयू का हाल भी बुरा है. वर्तमान में यहां16 बेड में से किसी पर बीपी की मॉनीटरिंग की व्यवस्था नहीं है. जबकि नियमानुसार हर बेड पर बीपी कप होना जरूरी है. ऐसे में एसआइसीयू में भर्ती मरीजों को अंदाज पर बीपी की मॉनीटरिंग की जा रही है. बता दें कि बीपी कप मरीज की बांह में लगने वाला उपकरण है, जो मॉनिटर से जुड़ा होता है. एसआइसीयू के बेड के समीप लगाये गये सभी बीपी कप धीरे-धीरे खराब हो चुके हैं.

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लेखक के बारे में

मैं गुरुस्वरूप मिश्रा. फिलवक्त डिजिटल मीडिया में कार्यरत. वर्ष 2008 से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पत्रकारिता की शुरुआत. आकाशवाणी रांची में आकस्मिक समाचार वाचक रहा. प्रिंट मीडिया (हिन्दुस्तान और पंचायतनामा) में फील्ड रिपोर्टिंग की. दैनिक भास्कर के लिए फ्रीलांसिंग. पत्रकारिता में डेढ़ दशक से अधिक का अनुभव. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एमए. 2020 और 2022 में लाडली मीडिया अवार्ड.

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