एमपीएल के मुख्य गेट पर हुए विवाद के बाद मामला पुलिस तक पहुंच गया है. एक ओर कंपनी प्रबंधन ने गेट जाम, आवागमन बाधित करने, अधिकारी से मारपीट और धमकी देने का आरोप लगाते हुए निरसा थाना में प्राथमिकी दर्ज करायी है, वहीं धरना दे रहे मजदूरों ने भी जातिसूचक गाली-गलौज और मारपीट का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज करायी है. पुलिस दोनों मामलों की जांच में जुट गयी है.
गेट अवरोध और मारपीट का आरोप
एमपीएल के टीएसओ ग्रुप के असाइनमेंट मैनेजर तपन कुमार चंद की लिखित शिकायत पर दर्ज प्राथमिकी में कहा गया है कि तीन अगस्त की सुबह कुछ लोगों ने एमपीएल के मुख्य गेट संख्या-01, गेट संख्या-02 और हाइवा गेट को अवरुद्ध कर धरना-प्रदर्शन किया. इससे कर्मचारियों, अधिकारियों और वाहनों का आवागमन प्रभावित हुआ तथा कंपनी के कार्य संचालन और सुरक्षा व्यवस्था पर असर पड़ा.
शिकायत के अनुसार, कंपनी अधिकारी किशन प्रसाद साव जब अपने आवास जाने के लिए मुख्य गेट पहुंचे तो प्रदर्शनकारियों ने उन्हें घेर लिया. आरोप है कि उन्हें रास्ता नहीं दिया गया, धमकी दी गयी और मारपीट की गयी. सुरक्षा कर्मियों के साथ भी धक्का-मुक्की और अभद्र व्यवहार किये जाने का आरोप लगाया गया है.
कई लोगों को बनाया गया नामजद
प्राथमिकी में बबलू कुमार चौधरी, मुखिया काली पहाड़ी, शेख तस्लीम, समुद मंडल, किशन मंडल, आकाश महतो, भीम मांझी, राज लोहार, मिहिर टास, अमित सिंह, मनोज सिंह और बलदेव मोढ़ी समेत कई लोगों को नामजद किया गया है. कंपनी प्रबंधन का कहना है कि इस घटना से विद्युत उत्पादन और सामान्य कार्यप्रणाली प्रभावित होने की आशंका बनी.
मजदूरों ने भी लगाया गंभीर आरोप
दूसरी ओर, धरना दे रहे मजदूरों ने आरोप लगाया है कि उनके साथ जातिसूचक गाली-गलौज की गयी और मारपीट की गयी. इस संबंध में भी निरसा थाना में शिकायत दर्ज करायी गयी है. मजदूर पक्ष का कहना है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया.
पुलिस कर रही जांच
निरसा थाना पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायतों के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. पुलिस का कहना है कि घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और जांच के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जायेगी.
