माइनिंग सेक्टर में तकनीकी विकास और उत्पादन बढ़ाने के साथ सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की जरूरत है. आधुनिक तकनीक के प्रभावी इस्तेमाल से खनन कार्यों को अधिक सुरक्षित, ऊर्जा दक्ष और उत्पादक बनाया जा सकता है. यह बातें आइआइटी आइएसएम धनबाद में आयोजित पांच दिवसीय एग्जीक्यूटिव डेवलपमेंट प्रोग्राम (इडीपी) के समापन समारोह में सामने आयीं.
सुरक्षा चुनौतियों पर विशेषज्ञों ने साझा किये अपने विचार
आइआइटी आइएसएम के डिपार्टमेंट ऑफ इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की ओर से आयोजित कार्यक्रम का विषय ‘माइन इलेक्ट्रिकल ड्राइव्स टेक्नोलॉजी एंड सेफ्टी चैलेंजेज’ था. कार्यक्रम में माइन इलेक्ट्रिकल ड्राइव्स, ऊर्जा दक्षता और खनन क्षेत्र में उभरती सुरक्षा चुनौतियों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किये.
समापन समारोह में जादवपुर यूनिवर्सिटी के पूर्व प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष प्रो. सुजीत कुमार विश्वास मुख्य अतिथि रहे. आइआइइएसटी शिबपुर के एसोसिएट प्रोफेसर प्रो. अतनु बनर्जी गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में शामिल हुए. आइआइटी आइएसएम के डिप्टी डायरेक्टर प्रो. शरत कुमार दास कार्यक्रम के पैट्रन थे.
खनन क्षेत्र में वायरलेस पावर टेक्नोलॉजी पर चर्चा
जॉइंट प्रोग्राम को-ऑर्डिनेटर प्रो प्रदीप कुमार साधु ने खनन क्षेत्र में वायरलेस पावर टेक्नोलॉजी की बढ़ती उपयोगिता पर प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से खदानों में मशीनों की दक्षता बढ़ाने के साथ सुरक्षा मानकों को भी मजबूत किया जा सकता है.
पांच दिनों में तकनीक और सुरक्षा के कई पहलुओं पर चर्चा
ईडीपी के दौरान पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, माइन मशीनरी, प्रिवेंटिव मेंटेनेंस, फ्लेमप्रूफ सिस्टम, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आइओटी) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) आधारित माइन मॉनिटरिंग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने जानकारी दी. इसके अलावा खनन दुर्घटनाओं से जुड़ी केस स्टडीज के माध्यम से सुरक्षा चुनौतियों और उनसे बचाव के उपायों पर भी चर्चा हुई.
विशेषज्ञों व प्रतिभागियों के बीच संवाद सत्र
कार्यक्रम में तकनीकी विशेषज्ञों और प्रतिभागियों के बीच संवाद सत्र भी हुए. प्रतिभागियों ने ईडीपी को खनन क्षेत्र की बदलती तकनीकी जरूरतों और सुरक्षा चुनौतियों को समझने की दृष्टि से उपयोगी और ज्ञानवर्धक बताया.
