आठ दिन पहले कमाने गया था बैतूल, सर्पदंश से राजेंद्र तुरी की मौत

33 वर्षीय राजेंद्र तुरी मजदूरी के लिए बैतूल गया था, लेकिन सर्पदंश ने उसकी जान ले ली. घर की आर्थिक तंगी दूर करने की उम्मीद में निकले राजेंद्र की अचानक मौत से परिवार पर संकट मंडराने लगा है.

गोमिया प्रखंड की चुट्टे पंचायत के सेवई गांव निवासी राजेंद्र तुरी उर्फ हीरो (33) की मध्यप्रदेश के बैतूल में सर्पदंश से मौत हो गयी. बुधवार सुबह मौत की खबर गांव पहुंचते ही परिवार में कोहराम मच गया. राजेंद्र करीब आठ दिन पहले ही घर की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए मजदूरी करने बैतूल गया था. वहां सरिया-सेंटरिंग का काम मिलने की जानकारी उसने परिजनों को फोन पर दी थी. कमाने के लिए घर से निकले राजेंद्र की अचानक मौत से परिवार पर आर्थिक संकट गहरा गया है.

आठ दिन पहले ही गया था मजदूरी करने

परिजनों के अनुसार, राजेंद्र आठ दिन पहले बैतूल गया था. वहां उसे सरिया-सेंटरिंग मजदूरी का काम मिला था. काम शुरू करने के बाद वह परिवार को आर्थिक मदद भेजने की उम्मीद में था. मंगलवार रात वह अन्य साथी मजदूरों के साथ सोया हुआ था. इसी दौरान जहरीले सांप ने उसे काट लिया.

सर्पदंश के बाद साथी मजदूर राजेंद्र को तत्काल घोड़ाडोंगरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गये. वहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया. घटना की सूचना मिलने के बाद परिजनों को जानकारी दी गयी. बुधवार सुबह गांव में मौत की खबर पहुंची तो परिवार और आसपास के लोगों में शोक की लहर दौड़ गयी.

परिवार का इकलौता कमाऊ सदस्य था राजेंद्र

राजेंद्र परिवार का इकलौता कमाऊ सदस्य बताया गया है. उसके परिवार में पत्नी रिखिया देवी, तीन बच्चे और मां जितनी देवी के साथ छोटा भाई सुरेंद्र है. पत्नी गर्भवती है. राजेंद्र की मौत के बाद परिवार के सामने बच्चों की देखभाल और रोजमर्रा के खर्च का संकट खड़ा हो गया है.

करीबी लोगों के अनुसार, परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से मजबूत नहीं थी. इसी कारण राजेंद्र मजदूरी करने दूसरे राज्य गया था. परिवार को उम्मीद थी कि बाहर काम कर वह घर की आर्थिक स्थिति सुधार सकेगा, लेकिन आठ दिन के भीतर ही उसकी मौत की खबर आ गयी.

पलायन के बीच एक और परिवार पर संकट

ग्रामीण क्षेत्रों से रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों की ओर मजदूरों के पलायन के बीच राजेंद्र की मौत ने उसके परिवार को गहरे संकट में डाल दिया है. स्थानीय लोगों का कहना है कि गांव में पर्याप्त रोजगार के अवसर नहीं मिलने के कारण मजदूरों को रोजी-रोटी के लिए दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता है. राजेंद्र भी इसी सिलसिले में बैतूल गया था.

अब उसकी मौत के बाद पीछे छूटे परिवार के सामने बच्चों की परवरिश और घर चलाने की चुनौती है. ग्रामीणों ने परिवार को सहायता उपलब्ध कराने की जरूरत जतायी है. परिजनों को राजेंद्र के शव के गांव पहुंचने का इंतजार है, जिसके बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की जायेगी.

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By Rakesh verma

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