एग्री क्लिनिक योजना के तहत किसानों के प्रशिक्षण के लिए नौ माह से संस्थान का चयन नहीं हो पाया है. इस वजह से किसानों को मृदा स्वास्थ्य, फसल पद्धति, पौधा संरक्षण, फसल बीमा, कटाई के बाद की प्रौद्योगिकियों के बारे में नि:शुल्क विशेषज्ञ सलाह व सेवाएं नहीं मिल पा रही है. बताया जाता है कि धनबाद में पिछले चार साल से जो संस्थान एग्री क्लिनिक योजना के तहत किसानों को प्रशिक्षण दे रहा था, उसका नवीकरण नहीं हुआ. इस वजह से मार्च 2024 से उक्त संस्थान ने प्रशिक्षण देना बंद कर दिया. इसके बाद पांच संस्थानों का नाम चुनकर विभाग की ओर से उपायुक्त कार्यालय को भेज दिया गया. इसपर अब तक कोई पहल नहीं हुई.
क्या है एग्री क्लिनिक योजना :
एग्री क्लीनिक योजना में एक सरकारी स्कीम है. इसके लिए नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट की तरफ से लोन मुहैया कराया जाता है. इस स्कीम में के तहत चयनित किसानों को 45 दिनों की ट्रेनिंग दी जाती है. इसके अलावा एग्रीकल्चर से पढ़ाई करने वाले ग्रेजुएट या पोस्ट ग्रेजुएट को 10 लाख रुपए का लोन मिलता है. इसका उद्देश्य किसानों को प्रशिक्षण देकर आय में वृद्धि करना है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
