धनबाद से शंकर साव और सुमन सिंह की रिपोर्ट
Dhanbad News: झारखंड के धनबाद जिले के बाघमारा थाना क्षेत्र में गुरुवार को एक दर्दनाक हादसे में दो मजदूरों की दम घुटने से मौत हो गई. दोनों मजदूर एक महीने से बंद पड़े नए सेप्टिक टैंक (सेफ्टी टैंक) की सेंटरिंग खोलने और सफाई के लिए अंदर उतरे थे. आशंका है कि टैंक के भीतर जहरीली गैस और ऑक्सीजन की कमी के कारण दोनों बेहोश हो गए. उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया.
सफाई के दौरान हुआ हादसा
जानकारी के अनुसार, जिस सेप्टिक टैंक में हादसा हुआ वह करीब एक महीने से बंद था. गुरुवार को सेंटरिंग हटाने के बाद उसकी सफाई का काम शुरू किया गया. लगभग 10 फीट गहरे टैंक में पहले एक मजदूर उतरा. कुछ देर बाद उसके बेहोश होने पर दूसरा मजदूर उसे बचाने के लिए नीचे गया, लेकिन वह भी जहरीली गैस की चपेट में आ गया. देखते ही देखते दोनों की हालत गंभीर हो गई.
अस्पताल पहुंचने से पहले टूट गई सांस
घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने बिना देर किए दोनों मजदूरों को बाहर निकाला और बाघमारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया. चिकित्सकों ने जांच के बाद दोनों को मृत घोषित कर दिया. इस खबर के बाद मृतकों के परिजनों में कोहराम मच गया, जबकि पूरे इलाके में शोक का माहौल है.
दोनों मृतकों की हुई पहचान
मृतकों की पहचान सदरयाडीह निवासी दिलीप महतो और महुदा थाना क्षेत्र के अंधारी निवासी राजेश महतो के रूप में हुई है. दोनों मजदूर निर्माण कार्य से जुड़े थे और सेप्टिक टैंक की सफाई का काम कर रहे थे. स्थानीय लोगों ने बताया कि टैंक लंबे समय तक बंद रहने के कारण उसके भीतर जहरीली गैस जमा हो गई थी.
प्रशासन और पुलिस ने शुरू की जांच
घटना की सूचना मिलते ही बाघमारा के अंचल अधिकारी (सीओ) गिरजानंद किस्कू सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे और मामले की जानकारी ली. वहीं बाघमारा थाना पुलिस भी अस्पताल पहुंची तथा पूरे घटनाक्रम की जांच शुरू कर दी. पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.
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पोस्टमार्टम रिपोर्ट से होगी पुष्टि
प्रारंभिक जांच में माना जा रहा है कि सेप्टिक टैंक के भीतर मौजूद जहरीली गैस और ऑक्सीजन की कमी के कारण दोनों मजदूरों की मौत हुई. हालांकि पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि हो सकेगी. इस हादसे ने एक बार फिर बिना सुरक्षा उपकरणों के सेप्टिक टैंक में उतरकर काम कराने की गंभीर लापरवाही और मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
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