Dhanbad News: साधु के वेश में करते थे ठगी, सात गिरफ्तार

Dhanbad News: चंबल एक्सप्रेस नशाखुरानी कांड का खुलासा : आरपीएफ, सीआइबी और जीआरपी की संयुक्त टीम को मिली सफलता.

धनबाद, ट्रेन संख्या 20975 (चंबल एक्सप्रेस) में हुई नशाखुरानी व लूट की घटना का रेल सुरक्षा बल (आरपीएफ), सीआइबी और जीआरपी की संयुक्त टीम ने उद्भेदन कर लिया है. मामले में संलिप्त सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जो साधु की वेश में यात्रियों को निशाना बनाते थे. पकड़ाने वालों में उत्तर प्रदेश अमेठी निवासी धूमी, रज्जाक जोगी, राजू, पहाड़ी, कृपाल, सुनील और मूला उर्फ रामचंद्र है.

क्या था मामला

10-11 मार्च 2026 की रात चंबल एक्सप्रेस के जनरल कोच में धनबाद से बांदा जा रही 30 वर्षीय महिला शिवानी को एक साधु ने प्रसाद के रूप में नशीला लड्डू खिलाकर बेहोश कर दिया था. आरोपी ने महिला का पर्स (जिसमें करीब 4000 नकद) और चांदी के गहने (पायल व बिछिया) चोरी कर लिया था. महिला को उसके पति ने बांदा में उतारकर अस्पताल में भर्ती कराया, जहां इलाज के दौरान 15 मार्च को उसकी मौत हो गयी. इसके बाद वहीं मामला दर्ज किया गया.

सीसीटीवी फुटेज से मिला क्लू

घटना के बाद सीसीटीवी फुटेज खंगाला गया. इसमें संदिग्ध साधु धनबाद स्टेशन पर ट्रेन से उतरकर पानी भरते और फिर उसी कोच में चढ़ते दिखा. आगे की जांच में आसनसोल और वर्धमान से कुल सात संदिग्ध साधुओं के ट्रेन में चढ़ने की पुष्टि हुई. ट्रेन रूट के विभिन्न स्टेशनों में डीडीयू, वाराणसी और सुल्तानपुर के सीसीटीवी फुटेज खंगालने पर गिरोह की मूवमेंट का पता चला. लोग बनारस से लखनऊ जाने वाली ट्रेन में सवार हुए और आगे अमेठी जिले के आसपास उतर गए. स्थानीय जांच में खुलासा हुआ कि यह गिरोह अमेठी जिले के गांवों में रहता है और साधु या फकीर का भेष बनाकर लोगों को अपना शिकार बनाते है.

कोडरमा में हुई गिरफ्तारी

घटना की जांच कर रही स्पेशल टीम मोबाइल लोकेशन के आधार पर पश्चिम बंगाल के आसनसोल पहुंची, जहां ये आरोपी काली पहाड़ी इलाके में अस्थायी डेरा डालकर रह रहे थे. टीम ने 31 मार्च को आसनसोल-गया पैसेंजर ट्रेन में पीछा कर कोडरमा में सभी सात आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया.

बरामद सामान

आरोपियों के पास से नशीली दवा (अल्प्राजोलम), ताबीज, जंतर, रुद्राक्ष माला, मूर्तियां, साधु वेशभूषा का सामान, चार मोबाइल फोन और 5050 नकद बरामद किये गये. जांच में सामने आया कि ये सभी मांगता जाति से हैं और साधु या फकीर का भेष बनाकर ट्रेनों और गांवों में भोले-भाले लोगों को नशीला पदार्थ खिलाकर लूट की वारदात को अंजाम देते थे.

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By Anand kumar upadhyay

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