धनबाद, आइआइटी आइएसएम में मंगलवार को ‘रोल ऑफ रिन्यूएबल एनर्जी इन क्रिटिकल मिनरल्स एंड माइनिंग ऑपरेशंस : नीड फॉर विकसित भारत’ विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया. टेक्समिन स्मार्ट क्लासरूम में आयोजित कार्यशाला में देशभर से शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं व उद्योग विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया. मुख्य वक्ता एनआइटी दुर्गापुर के निदेशक प्रो अरविंद चौबे ने खनन और क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में नवीकरणीय ऊर्जा की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला. कहा कि वैश्विक स्तर पर कार्बन उत्सर्जन कम करने की दिशा में तेजी से प्रयास हो रहे हैं और हाइड्रोजन भविष्य के ऊर्जा विकल्प के रूप में उभर रहा है. उन्होंने सोलर पैनल की दक्षता बढ़ाने, फ्लेक्सिबल सोलर सिस्टम जैसी नयी तकनीकों को अपनाने व अकादमिक संस्थानों और उद्योगों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया. संस्थान के निदेशक प्रो सुकुमार मिश्रा ने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए तकनीकी आत्मनिर्भरता और नवाचार को बेहद जरूरी बताया. उन्होंने कहा कि शोध कार्यों को केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित ना रखकर बाजार और उद्योगों तक पहुंचाना समय की मांग है. उन्होंने वैज्ञानिक सोच, आपसी सहयोग और नयी तकनीकों के विकास पर बल देते हुए शोधकर्ताओं से अपनी जानकारी को उपयोगी तकनीकों में बदलने की अपील की. कार्यक्रम की शुरुआत उप निदेशक प्रो धीरज कुमार के स्वागत भाषण से हुई. उन्होंने पेयर प्रोजेक्ट की प्रगति की जानकारी देते हुए कहा कि लिथियम, कोबाल्ट और कॉपर जैसे क्रिटिकल मिनरल्स स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों की रीढ़ हैं. कार्यशाला के विभिन्न तकनीकी सत्रों में ग्रीन स्टील, सतत ऊर्जा प्रबंधन, संसाधन दक्षता और क्रिटिकल मिनरल्स निष्कर्षण जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे. प्रो गौरी शंकर ने धन्यवाद ज्ञापन किया.
Dhanbad News : नयी तकनीक और उद्योग-शिक्षा समन्वय जरूरी : निदेशक
Dhanbad News : आइआइटी आइएसएम में रिन्यूएबल एनर्जी व क्रिटिकल मिनरल्स पर राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं व उद्योग विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया.
