Dhanbad News: बाल अधिकारों को मिले प्राथमिकता, तभी साकार होंगे वैश्विक लक्ष्य

Dhanbad News: आइआइटी आइएसएम के विद्यार्थियों को कैलाश सत्यार्थी ने किया संबोधित, एसडीजी की धीमी प्रगति पर जताई चिंता, युवाओं से सामाजिक बदलाव में भूमिका निभाने का आह्वान.

धनबाद, आइआइटी आइएसएम धनबाद में पहली बार विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि बाल अधिकारों और शिक्षा के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर तय किए गए लक्ष्य अब तक पूरी तरह हासिल नहीं हो सके हैं. उन्होंने सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) की धीमी प्रगति पर चिंता जताते हुए कहा कि यदि बच्चों के अधिकारों, खासकर बाल श्रम और शिक्षा पर ध्यान नहीं दिया गया, तो इन लक्ष्यों को पाना असंभव होगा. श्री सत्यार्थी आइआइटी में आयोजित शताब्दी व्याख्यान को संबोधित कर रहे थे. वैश्विक नेतृत्व की कमी बनी बड़ी वजह श्री सत्यार्थी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य अब लड़खड़ाने लगे हैं. इसकी बड़ी वजह यह है कि वैश्विक नेता इन मुद्दों पर एकजुट होकर काम करने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हैं. उन्होंने बताया कि दिसंबर 2025 तक बाल श्रम के पूर्ण उन्मूलन का लक्ष्य तय किया गया था, जो पूरा नहीं हो सका. शिक्षा के लक्ष्य भी अधूरे उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि वर्ष 2030 तक सभी के लिए शिक्षा सुनिश्चित करने का लक्ष्य भी खतरे में है. अब तक केवल लगभग 18 प्रतिशत लक्ष्य ही हासिल किए जा सके हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह संसाधनों या ज्ञान की कमी नहीं, बल्कि नैतिक साहस, जवाबदेही और इच्छाशक्ति की कमी का परिणाम है. संघर्षपूर्ण जीवन की कहानी से किया प्रेरित अपने संबोधन में सत्यार्थी ने अपने संघर्षपूर्ण जीवन की झलक साझा की. उन्होंने बताया कि बचपन बचाओ आंदोलन के माध्यम से उन्होंने हजारों बच्चों को बंधुआ मजदूरी, मानव तस्करी और शोषण से मुक्त कराया. इस दौरान उन्हें कई बार जान का जोखिम उठाना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी. उन्होंने कहा कि एक बच्चे को आजादी दिलाना पूरे समाज के भविष्य को बदलने जैसा है. समाज की साझा जिम्मेदारी पर जोर श्री सत्यार्थी ने कहा कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है. समाज के हर वर्ग को इसमें सक्रिय भागीदारी निभानी होगी. उन्होंने कहा कि जब तक सामूहिक प्रयास नहीं होगा, तब तक बाल श्रम और शोषण जैसी समस्याएं खत्म नहीं हो सकतीं. ‘कर्तव्य’ की सराहना उन्होंने आइआइटी आइएसएम के छात्रों की संस्था ‘कर्तव्य’ के कार्यों की विशेष रूप से सराहना की. श्री सत्यार्थी ने कहा कि यह संस्था इस बात का उदाहरण है कि युवा केवल अपने करियर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को भी समझते हैं. उन्होंने इन प्रयासों को प्रेरणादायक बताया. ऐतिहासिक आयाेजन : निदेशक संस्थान के निदेशक प्रो सुकुमार मिश्रा ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में इस आयोजन को ऐतिहासिक बताया. उन्होंने कहा कि वास्तविक शांति तभी संभव है, जब विज्ञान और तकनीक का उपयोग समाज की भलाई के लिए किया जाए. उन्होंने इस व्याख्यान शृंखला की शुरुआत के लिए मिहिर सिन्हा के योगदान की सराहना की और उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की. कार्यक्रम में संस्थान के बड़ी संख्या में शिक्षक, विद्यार्थी, अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे.

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By ANAND KUMAR UPADHYAY

ANAND KUMAR UPADHYAY is a contributor at Prabhat Khabar.

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