धनबाद. देश के बिजलीघरों में घटते कोयला भंडार के बीच कोल इंडिया ने आपूर्ति बढ़ाने की तैयारी तेज कर दी है. बिजली कंपनियों को ईंधन आपूर्ति समझौते (एफएसए) में निर्धारित मात्रा से अधिक कोयला उठाने की सुविधा दी जायेगी. जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त कोयले की ढुलाई रेल के साथ सड़क मार्ग से भी की जा सकेगी. इसका उद्देश्य कम स्टॉक वाले बिजलीघरों को तत्काल कोयला उपलब्ध कराना और बिजली उत्पादन पर संभावित असर को रोकना है.
57 बिजलीघरों में स्टॉक गंभीर स्तर पर
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के चार सितंबर के आंकड़ों के अनुसार, देश के 57 बिजलीघरों में कोयले का भंडार गंभीर स्थिति में पहुंच गया है. इन संयंत्रों में करीब 27.1 मिलियन टन कोयला उपलब्ध है, जबकि अनुशंसित स्टॉक 57.7 मिलियन टन होना चाहिए. यानी इन बिजलीघरों के पास अनुशंसित जरूरत का करीब 47 प्रतिशत ही कोयला बचा है.
कम स्टॉक वाले संयंत्रों में आपूर्ति बढ़ाने के लिए अतिरिक्त कोयला उठाव की सुविधा महत्वपूर्ण मानी जा रही है. जरूरत के अनुसार सड़क मार्ग से ढुलाई की अनुमति मिलने से रेल परिवहन पर दबाव की स्थिति में भी आपूर्ति जारी रखने में मदद मिल सकती है.
अगस्त में बिजली क्षेत्र को 48.46 मिलियन टन आपूर्ति
कोल इंडिया ने अगस्त में कुल 60.60 मिलियन टन कोयले की आपूर्ति की. इसमें बिजली क्षेत्र को 48.46 मिलियन टन कोयला मिला. पिछले वर्ष अगस्त की तुलना में बिजली क्षेत्र को की गयी आपूर्ति में 4.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी.
अप्रैल से अगस्त के बीच कंपनी ने कुल 322.90 मिलियन टन कोयले की आपूर्ति की, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 6.7 प्रतिशत अधिक है. इससे बिजली क्षेत्र की मांग पूरी करने के लिए कंपनी की आपूर्ति क्षमता में बढ़ोतरी का संकेत मिलता है.
पिटहेड पर 76 मिलियन टन कोयला उपलब्ध
कोल इंडिया की सहायक कंपनियों के पिटहेड यानी साइडिंग और स्टॉक यार्ड में करीब 76 मिलियन टन कोयला उपलब्ध है. इसके अलावा लगभग 46 मिलियन टन रेडी-टू-माइन कोयला मौजूद है. उपलब्ध स्टॉक को देखते हुए बिजली क्षेत्र में अतिरिक्त मांग आने पर आपूर्ति बढ़ाने की गुंजाइश बनी हुई है.
अब उत्पादन के साथ-साथ डिस्पैच बढ़ाना प्राथमिकता होगी. बीसीसीएल समेत कोल इंडिया की सभी सहायक कंपनियों के स्तर पर आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर रहेगा.
बारिश थमने के साथ उत्पादन बढ़ने की उम्मीद
मॉनसून के दौरान भारी बारिश के कारण कई कोयला क्षेत्रों में उत्पादन और परिवहन प्रभावित हुआ. अब बारिश कमजोर पड़ने के साथ खनन गतिविधियों में सुधार की उम्मीद है.
चार सितंबर को कोल इंडिया का दैनिक उत्पादन करीब 1.70 मिलियन टन रहा. वहीं सितंबर के पहले तीन दिनों में औसत दैनिक उत्पादन करीब 1.36 मिलियन टन था. मौसम अनुकूल होने पर उत्पादन और डिस्पैच दोनों में तेजी लाने की तैयारी है.
आंकड़ों में कोयला आपूर्ति की स्थिति
- 60.60 मिलियन टन — अगस्त में कोल इंडिया की कुल आपूर्ति
- 48.46 मिलियन टन — अगस्त में बिजली क्षेत्र को आपूर्ति
- 322.90 मिलियन टन — अप्रैल-अगस्त के बीच कुल आपूर्ति
- 76 मिलियन टन — पिटहेड पर उपलब्ध कोयला
- 46 मिलियन टन — रेडी-टू-माइन कोयला
- 57 — गंभीर स्टॉक वाले बिजलीघर
- 27.1 मिलियन टन — इन बिजलीघरों में उपलब्ध कोयला
- 57.7 मिलियन टन — अनुशंसित स्टॉक
