कोयला उत्पादन में बीसीसीएल-सीसीएल पिछड़ीं, ईसीएल ने पकड़ी रफ्तार

वित्तीय वर्ष 2026-27 में कोल इंडिया का कोयला उत्पादन शुरुआती पांच महीनों में निर्धारित लक्ष्य से पिछड़ गया है. सबसे कमजोर प्रदर्शन बीसीसीएल का रहा है, जो कई परिचालन चुनौतियों का सामना कर रहा है.

वित्तीय वर्ष 2026-27 के पहले पांच माह में कोल इंडिया का कोयला उत्पादन निर्धारित लक्ष्य से पीछे चल रहा है. 30 अगस्त तक कोल इंडिया ने 295.23 मिलियन टन के लक्ष्य के मुकाबले 266.14 मिलियन टन कोयले का उत्पादन किया है. इस तरह कंपनी लक्ष्य का 90.15% ही हासिल कर सकी है. पिछले वित्तीय वर्ष की इसी अवधि में 278.49 मिलियन टन उत्पादन हुआ था. इस आधार पर चालू वित्तीय वर्ष में उत्पादन में 4.44% की कमी दर्ज की गयी है. कोल इंडिया ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में कुल 815.24 मिलियन टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है.

पहले पांच माह के प्रदर्शन में बीसीसीएल की स्थिति सबसे कमजोर रही है. सीसीएल भी लक्ष्य से पीछे है, हालांकि पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में उसका प्रदर्शन बेहतर बताया गया है. वहीं ईसीएल ने लक्ष्य के करीब पहुंचते हुए पिछले वर्ष की तुलना में उत्पादन में वृद्धि दर्ज की है.

बीसीसीएल की उपलब्धि महज 76.22%

अप्रैल से अगस्त तक बीसीसीएल के लिए 14.62 मिलियन टन उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित था. इसके मुकाबले कंपनी ने 11.14 मिलियन टन कोयले का उत्पादन किया. इस तरह लक्ष्य की उपलब्धि 76.22% रही. पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में भी बीसीसीएल के उत्पादन में 17.78% की कमी दर्ज की गयी है.

कंपनी के उत्पादन पर कई परिचालन संबंधी चुनौतियों का असर पड़ रहा है. विभिन्न ओसीपी में आग की समस्या, कंपनी की जमीन पर अतिक्रमण तथा अवैध कोयला खनन और कोयला चोरी के खिलाफ कार्रवाई से जुड़े व्यवधान को प्रमुख कारणों में बताया गया है.

फॉरेस्ट क्लियरेंस और एमडीओ प्रदर्शन भी चुनौती

बीसीसीएल के मुराइडीह यूजी और कुइंया ओसीपी के फॉरेस्ट क्लियरेंस में देरी का असर भी उत्पादन पर पड़ रहा है. इसके अलावा रेवेन्यू शेयरिंग माइंस में एमडीओ के कमजोर प्रदर्शन को भी उत्पादन प्रभावित होने के कारणों में शामिल किया गया है.

उत्पादन बढ़ाने के लिए बीसीसीएल ने पहली तिमाही में चार नये पैच शुरू किये हैं. इनकी संयुक्त उत्पादन क्षमता 3.4 मिलियन टन प्रतिवर्ष बतायी गयी है. कंपनी को उम्मीद है कि दूसरी और तीसरी तिमाही में इन पैच से उत्पादन बढ़ेगा. बस्ताकोला ओसीपी की पर्यावरणीय मंजूरी वाली क्षमता को 2.1 एमटीपीए से बढ़ाकर 3.0 एमटीपीए तथा कुजामा ओसीपी की क्षमता को 1.2 एमटीपीए से बढ़ाकर 2.0 एमटीपीए करने की प्रक्रिया भी चल रही है.

जमीन और मंजूरियों पर विशेष जोर

मंगलवार को हुई कोल इंडिया की समीक्षा बैठक में बीसीसीएल, सीसीएल और ईसीएल की परियोजनाओं में उत्पादन प्रभावित करने वाले कारणों पर विस्तार से चर्चा हुई. बैठक की अध्यक्षता कोयला मंत्री जी. किशन रेड्डी ने की. लक्ष्य से पीछे चल रही कंपनियों को प्रदर्शन में सुधार के निर्देश दिये गये. साथ ही गुणवत्ता वाले कोयले के डिस्पैच पर भी जोर दिया गया.

समीक्षा के दौरान जमीन उपलब्धता, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन (आर एंड आर), पर्यावरण एवं वन मंजूरी तथा स्थानीय स्तर के विवादों के शीघ्र समाधान को उत्पादन बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण बताया गया. आने वाली तिमाहियों में नये पैच शुरू करने, मौजूदा परियोजनाओं की क्षमता बढ़ाने और लंबित मंजूरियां हासिल करने के जरिये उत्पादन में आयी कमी को पाटने की कोशिश की जायेगी.

कोल इंडिया के लिए अब शेष वित्तीय वर्ष में उत्पादन की रफ्तार बढ़ाना अहम होगा, क्योंकि निर्धारित वार्षिक लक्ष्य 815.24 मिलियन टन तक पहुंचने के लिए शुरुआती पांच माह की कमी की भरपाई भी करनी होगी.

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By Manohar kumar

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