करोड़ों का काला कारोबार करने वाली एक और फर्जी कंपनी का हुआ खुलासा

ई-वे बिल से 3.74 करोड़ का अवैध कोयला बेचा, न टैक्स दिया और न ही खदीदने का ब्योरा जांच में न फर्म मिला और न ही प्रोपराइटर धनबाद :गोविंदपुर की जय मां गायत्री इंटरप्राइजेज और जगत जननी इंटरप्राइजेज के बाद एक और फर्जी कंपनी सर्वश्री संतोष पासवान फर्म का खुलासा हुआ है. सर्वश्री संतोष पासवान […]

ई-वे बिल से 3.74 करोड़ का अवैध कोयला बेचा, न टैक्स दिया और न ही खदीदने का ब्योरा

जांच में न फर्म मिला और न ही प्रोपराइटर
धनबाद :गोविंदपुर की जय मां गायत्री इंटरप्राइजेज और जगत जननी इंटरप्राइजेज के बाद एक और फर्जी कंपनी सर्वश्री संतोष पासवान फर्म का खुलासा हुआ है. सर्वश्री संतोष पासवान फर्म ने ई-वे बिल से 3.74 करोड़ रुपये का कोयला बेचा, लेकिन न तो टैक्स दिया और न ही कोयला खरीदने संबंधी विवरणी ही जमा की.
राज्यकर विभाग ने सोमवार को फर्म के संबंध में जांच की तो न तो उल्लिखित पते पर फर्म मिला और न ही प्रोपराइटर. राज्यकर विभाग ने कंपनी के प्रोपराइटर के विरुद्ध एफआइआर करने की तैयारी शुरू कर दी है. अब तक दस शेल (फर्जी) कंपनियों के विरुद्ध राज्यकर विभाग एफआइआर दर्ज करा चुकी है.
क्या है मामला : संतोष कुमार साव ने सर्वश्री संतोष पासवान फर्म के नाम से कोयला का कारोबार करने के लिए 22 मई 2018 को जीएसटी का रजिस्ट्रेशन लिया. 2018-19 तक लक्ष्मी आयरन कोक लि, एकता कोल ट्रेडर्स, बलजीत कुमार एंड सन्स, गुप्ता ट्रेडिंग, कुबेर उद्योग सहित 80 कंपनियों को ई-वे बिल से कोयला बेचा.
सर्वश्री संतोष पासवान फर्म ने कोयला तो बेचा, लेकिन कहां से खरीद की इसकी विवरणी पोर्टल में नहीं डाली. कोयला के सेल आउट से सरकार को लगभग 40 लाख के टैक्स का चूना लगा. इसके अलावा कोयला पर मिलनेवाली सेस की राशि भी सरकार को नहीं मिली. राज्यकर विभाग की टीम ने जांच की तो कंपनी फर्जी निकली. यह पहला मामला नहीं है बल्कि धनबाद में इस तरह के मामले लगातार हो रहे हैं. बावजूद आज तक किसी पर कार्रवाई नहीं हुई.
डॉलर में दिखाया हाउस रेंट : राज्यकर विभाग की टीम को रजिस्ट्रेशन में जो तथ्य मिले हैं, उसमें कई बातें चौकानेवाली है. सर्वश्री संतोष कुमार का गोविंदपुर-धनबाद एड्रेस दिखाया गया है. यही नहीं 1234 डॉलर देकर हाउस रेंट का पेमेंट दिखाया गया है. जो मोबाइल नंबर दिया गया है, वह आउट ऑफ सर्विस है.
रजिस्ट्रेशन रद्द होने के बाद भी निकल रहा ई-वे बिल : राज्यकर विभाग के सूत्रों की मानें तो जांच में जो-जो कंपनियां फर्जी पायी गयी, उसका रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया गया है. आज भी जीएसटी पोर्टल में उन कंपनियों के नाम से ई-वे बिल निकल रहा है. जीएसटी कौंसिल को इसकी जानकारी दी गयी है. फर्जी कंपनी से ई-वे बिल लेकर जो कंपनियां आइटीसी का लाभ ले रही है, उनके खिलाफ भी कार्रवाई चल रही है.
विवरणी नहीं देनेवाले का नहीं निकलेगा ई वे-बिल : रजिस्ट्रेशन कराने के दो माह बाद विवरणी नहीं देनेवाली कंपनी का ई-वे बिल नहीं निकलेगा. जीएसटी कौंसिल ने 21 जून से इसे अनिवार्य कर किया था. लेकिन तकनीकी कारणों से इसकी तिथि बढ़ाकर 21 नवंबर कर दी गयी है.

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