धनबाद: संपत्ति के मामले में राज्य में अव्वल धनबाद जिला परिषद को कॉरपोरेट लुक तो दे दिया गया लेकिन बरामदे में अब भी बरसात में पानी टपकता रहता है. यहां कर्मचारियों की भारी कमी के कारण टेबल पर फाइल पड़ी रहती है, समय पर काम का निबटारा नहीं होता है.
जिला परिषद के सभी कक्षों एवं बरामदे में टाइल्स लगा दिये गये हैं, इससे चमक-दमक तो बढ़ गयी है लेकिन वर्षो से बरामदे के ऊपर लगे खपड़ैल अब बारिश रोक नहीं पाते. जिला परिषद में अध्यक्ष, सचिव, जिला अभियंता एवं प्रधान बाबू से लेकर अन्य कर्मचारियों तक के कार्यालयों को कॉरपोरेट लुक दे दिया गया है. लेकिन मुख्य गेट से सटे सभागार के बगल वाले कमरे की हालत आज भी वैसी ही है. वहां पुराने टेबल- कुर्सियां है. यत्र – तत्र फाइलें बिखरी मिल जायेंगी. ऐसा लगेगा अब भी पुराने पैटर्न से यहां के कर्मचारी उबर नहीं पाये हैं.
सड़ गये रोलर : सड़कें बनाने के लिए जिला परिषद के पास अपना रोलर हुआ करता था. आज सभी जंग खाकर सड़ रहे हैं. यहां 16 रोलर थे जिसमें से दो बोकारो भेज दिया गया. बाकी बचे 14. वह भी खराब पड़े हैं. इसे बनाने की बात जब-तब बोर्ड की बैठक में उठती है लेकिन उसे बनाने में जितनी राशि खर्च होगी, उतनी में नया रोलर खरीदा जा सकता है. ऐसे में उसकी नीलामी भी नहीं हो पा रही है.
10 पीउन अध्यक्ष के यहां : जिला परिषद में 34 पीउन हैं लेकिन इनकी प्रतिनियुक्ति अलग-अलग जगहों पर हैं. सबसे अधिक जिला परिषद की अध्यक्ष माया देवी के यहां 10, डीसी के यहां दो, डीडीसी के यहां तीन, जिला अभियंता के यहां दो प्रतिनियुक्त किये गये हैं. नये डीडीसी चंद्र किशोर मंडल जब अपने बंगले में आये तो उन्हें पता चला कि तीन लोग उनके यहां कार्यरत हैं. उन्होंने तीनों को जिला परिषद को लौटा दिया . उन्होंने कहा कि इतने अधिक कर्मचारी की उन्हें कोई जरूरत नहीं. उन्होंने सबको जिला परिषद में काम करने को कहा और तीनों वापस जिला परिषद आ गये.
घटते गये अधिकारी और कर्मचारी
जिला परिषद में जो कर्मचारी थे उनके रिटायर करने के बाद नयी बहाली नहीं हुई जिससे कर्मचारियों की कमी है. पहले जहां सहायक के 25 पोस्ट थे वहीं अभी 10 लोग कार्यरत हैं. दस कनीय अभियंताओं में अब महज तीन ही रह गये हैं. इसी तरह सहायक अभियंता के पांच पद थे और एक जिला अभियंता के. अभी जिला अभियंता समेत तीन ही रह गये हैं. अमीन का सभी पद खाली है. कार्य निरीक्षक से ही अमीन का काम लिया जा रहा है. जिला परिषद के औषधालय में 40 चिकित्सक हुआ करते थे . एक – एक कर रिटायर करते चले गये. अब दो ही चिकित्सक बचे हैं. ड्राइवर छह की जगह चार ही कार्यरत हैं. अलबत्ता चपरासी आज भी 34 कार्यरत हैं.
‘ पहले से जो व्यवस्था चली आ रही है, वही है. इसमें नया कुछ नहीं हैं. अलग-अलग काम के लिए चपरासी की प्रतिनियुक्ति की गयी है. वे लोग अपना काम कर रहे हैं. मैंने अपनी ओर से कुछ भी नहीं किया. रही बात बरामदे की टाली से पानी टपकने की तो उसे जिला अभियंता से कह कर बनवा दिया जायेगा.
माया देवी, अध्यक्ष, जिला परिषद
