धनबाद: आठ जुलाई को पेश हो रहे रेल बजट में धनबाद से खुल कर काठपाटी तक जाने वाली एलेप्पी एक्सप्रेस यानी मेडिकल एक्सप्रेस के फुल रैक के प्रस्ताव पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं. गरमी हो या बरसात हर सीजन में यही एक ट्रेन है जो न केवल हाउसफुल रहती है, बल्कि हर दिन में औसतन तीन सौ से अधिक वेटिंग लिस्ट रहती है.
क्या है हालत : दक्षिण भारत के लिए धनबाद से सीधे ट्रेन चलाने की वर्षो पुरानी मांग पर रेल प्रबंधन ने बोकारो से चलने वाली एलेप्पी एक्सप्रेस को वर्ष 2003 में धनबाद से शुरू करायी. एक जुलाई 2003 से यह ट्रेन धनबाद से चल रही है. लेकिन इस ट्रेन का हाफ रैक ही धनबाद से खुलता है. अभी यहां से ट्रेन में कुल 13 बोगियां जुड़ती है. इसमें एक-एक एसी टू एवं थ्री टियर, एक पेंट्री कार, एक जेनरल, आधा महिला जेनरल बोगी के अलावा आठ स्लीपर कोच होता है. एक माह पहले तक तो सात स्लीपर कोच ही रहता था. हाल ही में रेलवे बोर्ड ने एक एक्स्ट्रा स्लीपर कोच स्थायी रूप से जोड़ने की अनुमति दी. बाकी 11 कोच टाटा नगर से आती है जो राउरकेला में जुड़ता है. वहां से फुल ट्रेन चलती है.
हर बजट में होती है अनुशंसा
धनबाद रेल मंडल द्वारा पिछले पांच वर्षो से एलेप्पी एक्सप्रेस का फुल रैक देने की मांग रेलवे बोर्ड से की जा रही है. पूर्व मध्य रेलवे इसकी अनुशंसा रेलवे बोर्ड से करती रही है. इस ट्रेन में हर दिन औसतन तीन सौ वेटिंग लिस्ट रहने के बाद भी एक्स्ट्रा कोच नहीं लग पाता है. फूल रैक चालू होने पर भी यह ट्रेन घाटे में नहीं रहेगी. यात्रियों की जो मांग है उसको देखते हुए ट्रेन में कम से कम पांच एसी बोगी तथा एक दर्जन स्लीपर बोगी की जरूरत है. इस बजट में अगर फुल रैक की मंजूरी मिल जाती है तो धनबाद के यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी. इस ट्रेन में नब्बे प्रतिशत से अधिक यात्री मरीज या उनके परिजन होते हैं, जिनको हर हाल में यात्र करनी ही पड़ती है.
