धनबाद : पानी के लिए सड़क पर उतरे लोग

मटकुरिया छठ तालाब के पास रहने वाले लोगों ने किया रोड जाम, अफरातफरी रोज-रोज की जल समस्या से त्रस्त हैं नागरिक पुलिस ने पहल कर हटाया रोड जाम धनबाद : पानी की किल्लत से परेशान बैंकमोड़ मटकुरिया छठ तालाब के पास रहने वाले लोग शनिवार को सड़क पर उतर गये. लोगों ने नियमिति व पर्याप्त […]

मटकुरिया छठ तालाब के पास रहने वाले लोगों ने किया रोड जाम, अफरातफरी
रोज-रोज की जल समस्या से त्रस्त हैं नागरिक पुलिस ने पहल कर हटाया रोड जाम
धनबाद : पानी की किल्लत से परेशान बैंकमोड़ मटकुरिया छठ तालाब के पास रहने वाले लोग शनिवार को सड़क पर उतर गये. लोगों ने नियमिति व पर्याप्त जलापूर्ति की मांग को लेकर मटकुरिया रोड को जाम कर दिया. इस दौरान सड़क पर टायर जलाकर प्रदर्शन भी किया गया. इस दौरान लगभग डेढ़ घंटे तक सड़क पर जाम लग गया. बैंक मोड़ पुलिस के हस्ताक्षेप के बाद लोगों ने जाम हटाया. सुबह साढ़े आठ बजे ही स्थानीय लोग सड़क पर उतर चुके थे. लोगों का कहना था कि जब तक उन्हें पानी नहीं मिलेगा, वे सड़क से नहीं हटेंगे.
इस दौरान दर्जनों लोगों के अलावा महिलाएं भी शामिल थीं. पुलिस ने उन्हें आश्वासन दिया कि विभाग से उनकी बात करायी जायेगी. सड़क जाम से आम लोगों की परेशानी बढ़ जाती है, इसलिए सभी सड़क से हट जायें. इस आश्वासन के बाद लोगों ने सड़क जाम हटा लिया.
पानी की भारी किल्लत से थे परेशान : बैंकमोड़ मटकुरिया छठ तालाब के लोगों का कहना है कि पिछले एक-दो सप्ताह से उन्हें पानी की भारी परेशानी हो रही है. मैथन जलापूर्ति का पानी महज 10 से 15 मिनट तक ही मिलता है.
पानी का प्रेशर इतना कम है कि बहुत देर में एक बाल्टी पानी भी नहीं भर रहा है. विभाग में शिकायत करने पर भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही है. किसी दिन तो बिल्कुल पानी नहीं मिलता है. सड़क बनाने के क्रम में कुछ सप्ताह पूर्व पाइप को पूरी तरह से हटा दिया गया था. उसके बाद जो पाइप लगायी गयी, उसके कारण उन्हें पानी की समस्या झेलनी पड़ रही है. इस संबंध में वहीं पेयजल विभाग ने बताया कि मटकुरिया में विभाग की पाइप फट गयी थी. इसके कारण मरम्मत में एक दिन लग गया. इस कारण उन्हें पानी नहीं मिला था.
ज्यादातर घर मैथन जलापूर्ति पर निर्भर : बैंकमोड़ क्षेत्र के ज्यादातर घर मैथन जलापूर्ति पर निर्भर है. विकास नगर, मटकुरिया, शास्त्री नगर, पुराना बाजार आदि जगहों के मकान पूरी तरह से मैथन जलापूर्ति पर ही निर्भर रहते हैं.
पानी नहीं खुलने पर इन्हें काफी परेशानियों का समाना करना पड़ता है. स्थानीय लोग बताते हैं कि गर्मियों में इनकी हालत खराब हो जाती है, मगर सर्दियों के मौसम में भी इन्हें पानी की समस्या झेलनी पड़ रही है.

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