धनबाद : शहर में जलसंकट दूर करने के उपायों पर हाकिम-हुक्मरान चुप्पी साधे हुए हैं. विभागों ने पत्राचार कर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली. अच्छे दिन के वादे और विकास के दावों के शोर में प्यासी जनता की पुकार अनसुनी रह जा रही है. अभी तो अनियमित जलापूर्ति (प्राय: 24 घंटे के बाद) हो रही है. लेकिन जो स्थिति है उसमें वह भी बंद हो सकती है. इस गंभीर समस्या पर न तो जिले के अधिकारी और न ही जनता के नुमाइंदे कोई पहल कर रहे हैं.
मैथन के पानी को भेलाटांड़ वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में साफ कर 19 जलमीनार के जरिये शहर में वितरित किया जाता है. लेकिन लंबे समय से लोगों को नियमित रूप से पानी नहीं मिल रहा है. बिजली संकट रहने पर पेयजल विभाग संकट का कारण बिजली का नहीं मिलना बताता है. लेकिन जब बिजली रहती है तो वह मोटर का खराब होना और पाइप लाइन से पानी चोरी होने को कारण बताता है.
नहीं बंद कर सके अवैध कनेक्शन : पेयजल विभाग का कहना है कि मैथन से भेलाटांड़ ट्रीटमेेंट प्लांट को प्रतिदिन 55 एमएलडी पानी भेजा जाता है. मगर निरसा में कई जगहों पर पाइप में अवैध कनेक्शन कर भारी मात्रा में पानी लिया और बर्बाद किया जाता है. लिहाजा भेलाटांड़ मात्र 30 से 35 एमएलडी पानी ही पहुंच पाता है.
कुछ दिनों पूर्व अवैध कनेक्शन हटाने के लिए अधिकारी निरसा के ग्रामीण क्षेत्रों में गये हुए थे. मगर ग्रामीणों ने इसका पुरजोर विरोध किया. अवैध कनेक्शन नहीं हटाया जा सका है. ग्रामीणों की मांग है कि जब तक उन्हें वैध कनेक्शन नहीं दिया जाता यह कनेक्शन नहीं हटेगा. अब पूरा मामला सरकार पर निर्भर करता है.
कई मोटर भी जवाब देने की स्थिति में
नियमित रूप से जलापूर्ति के लिए भेलाटांड़ वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में 420 किलोवाट के छह और मैथन में दो हजार किलो वाट के चार मोटर हैं. इनमें से कई को बदलने की जरूरत है. यांत्रिक प्रमंडल अधिकारी ने बताया कि अगस्त माह में पेयजल विभाग रांची और नगर विकास विभाग रांची को पत्र के माध्यम से खराब मोटर की जानकारी दी जा चुकी है.
मोटर सहित केबल पंक्चर, पैनल आदि में बार-बार खराबी का प्राक्कलन दिया गया है, जो कुल 7 करोड़ 79 लाख रुपये है. हालांकि अभी तक उसमें कोई कार्यवाही नहीं कीगयी है. बताया कि प्रतिदिन कुछ न कुछ खराबी मोटर, केबल , पैनल आदि में आती ही रहती है. जो विभाग के मिस्त्री द्वारा बनवा कर काम चलाया जा रहा है.
अवैध कनेक्शन पर बोले विधायक अरूप चटर्जी
निरसा विधायक अरूप चटर्जी का कहना है कि पेयजल विभाग 10-12 गांवों के अवैध कनेक्शन के पीछे पड़ा हुआ है. मगर पैसे लेकर उसने निरसा से गोविंदपुर तक गैरेज व होटलों में अवैध कनेक्शन दे रखा है. अगर होटल व गैरेज से अवैध कनेक्शन हट जाए तो शहरी क्षेत्रों की जलापूर्ति की परेशानी खत्म हो जायेगी.
सरकार की मैथन जलापूर्ति योजना ग्रामीणों के हक में बिल्कुल नहीं है. अगर किसी के घर के पास से पानी जाये और उसे प्यासा रहने को कहा जाये तो लोग क्या करेंगे. जब तक ग्रामीणों को वैध कनेक्शन नहीं दिया जायेगा तब तक ये कनेक्शन ऐसे ही रहेंगे. ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की काफी समस्या है.
कहते हैं कार्यपालक अभियंता
पेयजल विभाग के कार्यपालक अभियंता हरेंद्र मिश्रा कहते है कि बिजली नहीं रहने के कारण जलापूर्ति में ज्यादा समस्या आती है. मोटर बदलने का आवेदन अगस्त माह में दिया जा चुका है. मगर अभी तक मामले में कोई कार्यवाही नहीं हुई है. वहीं अवैध कनेक्शन भी एक बड़ी समस्या है.
कहां-कहां अवैध कनेक्शन
निरसा के राजपुरा, गोपालपुर, गोपालगंज, रामकनाली, निरसा बाजार, हरियाजाम, केलियाना, मुगमा, कंचनडीह, सिंहपुर, हाथबाड़ी आदि जगहों पर. इसके अलावा निरसा से गोविंदपुर के बीच बहुत से होटल, गैरेज आदि में अवैध कनेक्शन है.
