धनबाद : पापा के बोनस से आती थी दुर्गोत्सव की रौनक

धनबाद : बचपन की दुर्गा पूजा आज भी जेहन में है. उस समय पापा के पूजा बोनस का पूरा इंतजार होता था, ताकि हम सभी भाई-बहनों के लिए नये कपड़े खरीदा जाये. दुर्गा पूजा में नये नये कपड़े पहन कर पूरे परिवार के साथ दुर्गा पूजा घूमने का अलग ही आनंद था. उन दिनों पापा […]

धनबाद : बचपन की दुर्गा पूजा आज भी जेहन में है. उस समय पापा के पूजा बोनस का पूरा इंतजार होता था, ताकि हम सभी भाई-बहनों के लिए नये कपड़े खरीदा जाये. दुर्गा पूजा में नये नये कपड़े पहन कर पूरे परिवार के साथ दुर्गा पूजा घूमने का अलग ही आनंद था. उन दिनों पापा पैदल अथवा ऑटो से ही शहर के लगभग सारे पंडाल जाकर मां के दर्शन करते थे. हम कई बार तो इतना थक जाते थे कि छोटे भाई को पापा अपने कंधों पर लेकर मां का दर्शन कराते थे.
आज जब दुर्गा पूजा में अपने अपने पुत्र अभिज्ञान को कंधे पर लेकर मां दुर्गा का दर्शन कराता हूं तो अपना बचपन याद आ जाता है. उन दिनों दुर्गा पूजा घूमने के लिए प्रत्येक सदस्य को अलग से पैसे दिए जाते थे, पर मजे की बात थी कोई भी अपना पैसा खर्च नहीं करता था. मेला में पापा ही सारा खर्च करते थे.
दुर्गा पूजा में उन दिनों झरिया, गोल्फ ग्राउंड में प्रत्येक वर्ष सर्कस आता था. मूंगफली खाते-खाते सर्कस देखने का अलग ही मजा था. दशहरे के दिन बाहर कितनी भी मिठाइयां खा लेते थे, पर पापा के साथ हम लोग पांच तरह की मिठाई लेने कभी नहीं भूलते थे. काश वो दिन कैमरे में बंद होता और आज देख पाते.
डॉ धर्मेंद्र कुमार सिंह, डिपार्टमेंट ऑफ कैमिस्ट्री, पीके राय कॉलेज

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