धनबाद : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान का सरकारी दफ्तरों में ही मखौल उड़ रहा है. जिला मुख्यालय में कई सरकारी दफ्तरों में ही नियमित साफ-सफाई नहीं हो रही.झारखंड खनिज क्षेत्र विकास प्राधिकार (जमाडा), जिसके ऊपर गैर निगम क्षेत्रों की सफाई की जिम्मेदारी है, के मुख्यालय का बुरा हाल है. दफ्तर के मुख्य भवन में ही जहां-तहां पान की पीक है.
गंदगी का भी अंबार लगा रहता है. यहां सफाई का साफ अभाव दिखता है. इसी तरह कंबाइंड बिल्डिंग, जहां दो दर्जन से अधिक सरकारी दफ्तर हैं, में भी नियमित साफ-सफाई नहीं होती. भवन के बाहर कूड़ों का अंबार लगा रहता है. अंदर में भी नाम मात्र की ही सफाई होती है. बारिश के समय तो इस दफ्तर की हालत नारकीय हो जाती है. ऊपर से भवन के निचले तल पर सरकारी कर्मी अपने दुपहिये वाहन लगा देते हैं. जिससे यहां बाहर से आने वाले लोगों के लिए चलना भी मुश्किल हो जाता है.
झारखंड ऊर्जा निगम लिमिटेड धनबाद प्रमंडल के हीरापुर स्थित दफ्तर में भी सफाई का अभाव है. यहां भी जहां-तहां कचरा फेंका हुआ रहता है. जबकि इन दफ्तरों में भी पीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट की शुरुआत काफी ताम-झाम से हुई थी. उस वक्त अधिकारियों ने झाड़ू ले कर तस्वीरें खिंचवायी थी. लेकिन धीरे-धीरे सफाई अभियान कागज पर ही सिमट कर रह गया. केवल वार्षिक जलसा के दिन ही इन दफ्तरों में सफाई होती है.
