भारत में आधुनिक चिकित्सा की जानकारियों का प्रामाणिक स्रोत

भारत में चिकित्सा के बदलते ट्रेंड की तस्वीर धनबाद : प्रत्येक चार में एक भारतीय दिल संबंधी रोगों के कारण 70 साल की उम्र तक नहीं पहुंच पाता. स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में 195 देशों में भारत 154वें स्थान पर है. स्वास्थ्य संबंधी ऐसी और भी परेशानियां और बुरी खबरें हैं जिनसे भारतीय चिकित्सा जगत […]

भारत में चिकित्सा के बदलते ट्रेंड की तस्वीर
धनबाद : प्रत्येक चार में एक भारतीय दिल संबंधी रोगों के कारण 70 साल की उम्र तक नहीं पहुंच पाता. स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में 195 देशों में भारत 154वें स्थान पर है. स्वास्थ्य संबंधी ऐसी और भी परेशानियां और बुरी खबरें हैं जिनसे भारतीय चिकित्सा जगत की बदरंग तस्वीर और बेदम तंत्र का चेहरा सामने आता है.
इसके उलट भी एक तस्वीर है : सुबह सर्जरी और शाम को छुट्टी वाली डे केयर सर्जरी, डॉक्टर कहीं और मरीज कहीं यानी टेली मेडिसिन, सर्जरी के निशान से छुट्टी देनेवाली स्कारलेस सर्जरी जैसी सुविधाएं इस देश में उपलब्ध हैं और बेहद किफायती दर पर. 15 प्रतिशत सालाना वृद्धि की दर से पनप रहे सेहत के कारोबार से भारत में चिकित्सा के बदलते ट्रेंड की एक तस्वीर बनी है. इस तस्वीर से रूबरू कराती है डॉ दीपक प्रकाश की किताब ‘भारत में आधुनिक चिकित्सा’. स्वास्थ्य संबंधी लेखन के लिए मशहूर और विश्वसनीय यह नाम पाठकों के लिए कई सहूलियतों की सूचना के साथ हाजिर है.
जरूरी स्वास्थ्य चेतना पर बल : दर्द के अहसास के बिना डेढ़ सेमी की सुराख से बड़ी सर्जरी आसानी से हो जाती है और वह भी भारत में तो यह जानकारी पाठक को दंग कर देती है. दरअसल आजकल हॉट केक की तरह प्रचलित है आधुनिक चिकित्सा की शब्दावली मिनिमली इन्वेसिव सर्जरी.
और इसी तरह रोबोटिक सर्जरी है जो भारत में उपलब्ध है. भारत में किस तरह मेडिकल टूरिज्म विकसित हो रहा है, चिकित्सा विज्ञान की अत्याधुनिक विधि जीन थेरेपी की जरूरत से भी पाठक आसानी से रूबरू हो जाते हैं इस किताब की सैर में. सेकेंड ओपिनियन की जरूरत, समझदार और हाइटेक पेशेंट, डे-केयर सर्जरी, भारत में एयर एंबुलेंस, किराये की कोख का कारोबार, लिवर ट्रांसप्लांटेशन, राइनोप्लास्टी : नाक की कॉस्मेटिक सर्जरी, संबंधों की पड़ताल के लिए डीएनए टेस्ट, जेनेटिक कुंडली से तय हो रहे रिश्ते आदि ऐसे ही विषय हैं जो इस किताब की व्यापकता और उपयोगिता के इंडिकेटर हैं. इसी तरह कई अहम और जरूरी समझदारी से पाठक को लैस करनेवाले अध्याय समीक्ष्य किताब को महत्वपूर्ण बनाते हैं.
सरसता है लेखन की ताकत
पेशे से चिकित्सक और शौक से रचनाशील डॉ दीपक प्रकाश अपने छात्र काल से दिनमान और रविवार जैसी प्रसिद्ध और मानक पत्रिकाओं से जुड़े रहे और बाद के दिनों में प्रभात खबर, नवभारत टाइम्स, हिंदुस्तान, राजस्थान पत्रिका में स्वास्थ्य संबंधी लेखन करते रहे हैं.
प्रसिद्ध आलोचक नामवर सिंह, खगेंद्र ठाकुर, कथाकार अवधेश प्रीत, रंगकर्मी एमके रैना से उनके साक्षात्कार काफी चर्चित रहे हैं. इस सर्जनात्मकता और पत्रकारीय सरोकार की छाप डॉ प्रकाश के स्वास्थ्य संबंधी लेखन में भी मिलता है. यही कारण है कि वह इस पुस्तक में जब भारत में ग्रीन हॉस्पिटल और रोबोटिक सर्जरी पर लिखते हैं तो सरसता पाठक को बांधे रखती है. स्वास्थ्य संबंधी जानकारियां जब रोचक अंदाज में मिले तो वह सुस्वादु दवा की तरह पाठक को समृद्ध करते हुए उसके भीतर उतर जाती है.

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