ईद का बाजार गुलजार : सज गयी सेवइयां, खनक रहीं चूड़ियां

हर तरफ इत्र की खुशबू, कपड़ों की खरीदारी जोरों पर जयपुर की लहठी और फिरोजपुर की कांच की चूड़ी की खूब डिमांड गुलाब, केवड़ा, मजमुआ, खस, संदल जैसे परंपरागत इत्र की भी मांग धनबाद : रोजदारों को बेसब्री से ईद के चांद के दीदार का इंतजार है. संभवत: 15 या 16 जून को ईद मनायी […]

हर तरफ इत्र की खुशबू, कपड़ों की खरीदारी जोरों पर
जयपुर की लहठी और फिरोजपुर की कांच की चूड़ी की खूब डिमांड
गुलाब, केवड़ा, मजमुआ, खस, संदल जैसे परंपरागत इत्र की भी मांग
धनबाद : रोजदारों को बेसब्री से ईद के चांद के दीदार का इंतजार है. संभवत: 15 या 16 जून को ईद मनायी जायेगी. ईद को लेकर बाजारों की रौनक बढ़ गयी है.
सेवइयां और इत्र की खुशबू सबको मोहित कर रही है. पुराना बाजार में हर तरफ भीड़ है. चूड़ी की दुकान हो या सौंदर्य प्रसाधन, कपड़े की दुकान हो या जूता-चप्पल की, हर तरफ खचाखच भीड़ है. जयपुर की लहठी और फिरोजपुर की कांच की चूड़ी की खूब डिमांड है. स्थानीय स्तर पर तैयार लहठी व चूड़ी की भी मांग हो रही है. बाजार में देशी व विदेशी दोनों तरह के इत्र उतारे गये हैं. गुलाब, केवड़ा, मजमुआ, खस, संदल जैसे इत्र परंपरागत हैं. इनके साथ विदेशी इत्र डी लव, अलिशा, केएस स्पार्क, ब्लू फॉर मैन, आइस बर्ज, ब्लू लेडी, मैगनेट, पल्पी ऑरेंज, चेरी और लव मी भी उपलब्ध है. इसकी कीमत 250 से लेकर 1150 रुपये तक है.
मोहब्बत बांटने का महीना
रमजान माह सबे कदर में कुरान नाजील हुआ था. रोजा रखना मुस्लिम कौम के लिए फर्ज है. रोजा में मगरीब और फजर की नमाज अहम होती है. इसके बीच तराबीह की नमाज अदा की जाती है जो अल्लाह ताला को बहुत पसंद है. इस माह अल्लाह के बंदे अच्छे काम को करने और बुरे काम से बचने के लिए तौफिक मांगते हैं. रमजान माह में इबादत में अल्लाह ताला को राजी कर आनेवाली परेशानियों को रोकने की इल्तिजा की जाती है. रोजा रखकर बंदा जब पाक परवर दीगार से कुछ मांगता है तो पाक परवर दीगार उस पर तरस खाकर मुराद पूरी करते हैं. मुल्क में अमन-चैन, सुकून और शांति मांगने का महीना है. हमदर्दी और एक दूसरे को समझने का महीना है.
मुहब्बत और भाईचारगी बांटने का महीना है. मिस्किन के दुख दर्द को बांटने का महीना है. दाना और पानी खुदा के बंदों पर असीम नेमत है. जब रोजा खोलते हैं उस वक्त इसकी कद्र समझ में आती है. रोजा रखकर अपने लोगों के सलामती की दुआ मांगते हैं. इबादत करते हैं. गुनाहों से तौबा करते हैं. रमजान में अल्लाह अपने बंदों पर खास तवज्जो करते हैं. बंदा जो मांगता है उसके मुताबिक उसे अता करते हैं.
मोहम्मद मजहर उल हक, ईमाम, ईदगाह मस्जिद, नया बाजार
नेकी करने और बदी से बचने के लिए रोजा
धनबाद. मुस्लिम कौम का सबसे पावन महीना रमजान का होता है. यह रहमत और बरकत का महीना है. रोजेदार कहते हैं : इस्लाम में रोजा रखना फर्ज है. नेकी करने और बदी से बचने के लिए रोजा रखा जाता है. जकात निकालना रोजेदारों का फर्ज है. आमदनी का ढाई प्रतिशत जकात के लिए निकालना जरूरी होता है. जकात जरूरतमंदों के बीच बांटा जाता है. जिन मुसाफिर को मस्जिद में इफ्तार करना पड़ता है उनके लिए रोजेदार घर से इफ्तार की सामग्री मस्जिद भिजवाते हैं.
हमारे कौम में लड़कों की उमर दस साल और लड़कियों की उमर बारह साल हो जाने के बाद रोजा रखना फर्ज होता है. रहमत और बरकत का महीना है रमजान. रोजा रखकर कुरान का तिलावत करनेवाले को 70 गुना सवाब मिलता है.
शहबाज आलम, नया बाजार
रमजान का महीना पाक महीना है. पचास साल से रोजा रख रहा हूं. रोजा रखनेवालों पर अल्लाह ताला की खास इनायत होती है. पांचों टाइम की नमाज अदा करते हैं. रमजान में खुदा से गुनाह की माफी मांगी जाती है. रोजा रख अल्लाह के करीब आते हैं.
हाजी वसीह अहमद, नया बाजार
अल्लाह पाक से नजदीकी के लिए रोजा रखते हैं. इबादत करते हैं. मिस्किन की मदद करना हमारा फर्ज है. रोजा का नमाज यह सोचकर पढ़ते हैं कि हमारे गुनाहों की बख्शाइस हो जाये. पाक परवरदीगार सबोंपर रहमत बरसायें.
शहनबाज, नया बाजार
हमारा मुबारक महीना है. पूरे माह पाबंदी से तिलावत करते हैं. अल्लाह ताला से गुनाहों की माफी मांगते हैं. फजर और मगरीब की नमाज अहम होती है. पांच टाइम नमाद अदा कर जकात निकालना हमारा फर्ज है.
मोहम्मद सैफी अहमद, नया बाजार
रमजान आने से पहले ही हमारी तैयारी शुरू हो जाती है. पांचों टाइम नमाज अदा करते हैं. समय कैसे बीत जाता है पता ही नहीं चलता. पूरा माह उत्साह में गुजरता है. खुदा से यही इल्तिजा है मुल्क में अमन शांति फैले.
मोहम्मद फैयाज खान, नया बाजार
मुसलमानों का पांच फर्ज है. रोजा, हज, जकात, तौहीद, नमाज. जिसे मानना मुसलमानों का फर्ज है. हम खुदा के बंदे हैं. उनकी इबादत में समय कट जाता है. कुरान का तीस पेज का पारा पढ़ना जरूरी होता है.
मोहम्मद फैयाज सिद्दिकी, नया बाजार

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