कोयला वितरण नीति का सही से नहीं होता पालन
सांसद-विधायक भी आगे नहीं आते, रंगदारों के चंगुल में कई खदान
धनबाद : हार्डकोक इंडस्ट्रीज की स्थिति ठीक नहीं है. बीसीसीएल की कोयला वितरण नीति के कारण हार्डकोक इंडस्ट्रीज को कोयला का आवंटन नहीं हो रहा है. मई में 31 प्रतिशत कोयला आवंटन किया गया, इसमें 13 प्रतिशत ऑफर बंद कोलियरी का है. जबकि हार्डकोक इंडस्ट्रीज से प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से लगभग पचास हजार लोग जुड़े हैं. बीसीसीएल का यही रवैया रहा तो उद्यमी उद्योग को बंद कर घर बैठ जायेंगे.
इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बीएन सिंह ने कहा कि बीसीसीएल के बाद सबसे बड़ा सेक्टर हार्डकोक इंडस्ट्रीज है. बीसीसीएल लगातार स्थानीय उद्योगों की उपेक्षा कर रहा है. जरूरत का पचास प्रतिशत कोयला भी नहीं मिल रहा है. मार्च में 44 प्रतिशत कोयला का आवंटन किया गया. अप्रैल में 46 प्रतिशत और अब मई का आवंटन महज 31 प्रतिशत था. ऐसी परिस्थिति में उद्योग कैसे चलेगा.
सांसद व विधायक को पत्र लिखकर पहल करने की अपील की गयी. लेकिन कोई जनप्रतिनिधि आगे नहीं आ रहे हैं.
दामोगोड़िया में कोयला आवंटन करे बीसीसीएल : एसोसिएशन अध्यक्ष ने कहा कि दामोगोड़िया में कोयला आवंटन की मांग लगातार की जा रही है. यहां का कोयला हार्डकोक के लायक है और उठाव में भी परेशानी नहीं है. बीसीसीएल प्रबंधन को आवंटन के समय इस पर ध्यान देना चाहिए.
दबंगों के कारण नहीं उठ रहा कोयला
एसोसिएशन अध्यक्ष बीएन सिंह ने कहा कि खदानों पर दबंगों का बोलबाला है. धनसार कोलियरी का रोड सेल बंद रहने के बाद भी बीसीसीएल की ओर से कोयला आवंटन कराया जा रहा है. अप्रैल में धनसार कोलियरी में 13 प्रतिशत कोयला आवंटन हुआ, लेकिन कोयला नहीं उठा. 46 प्रतिशत आवंटन में 13 प्रतिशत दबंगों की भेंट चढ़ गया. सब कुछ जानने के बाद भी धनसार में आवंटन किया गया है.
कोयला उठाव की गारंटी भी दे बीसीसीएल
एसोसिएशन अध्यक्ष बीएन सिंह ने कहा कि बीसीसीएल कोयला का आवंटन करता है तो उठाव की भी गारंटी देना चाहिए. एक तो कोयले का कम आवंटन हो रहा है. दूसरी तरफ जो कोयला आवंटित होता है, उसका उठाव नहीं हो पाता है. कई कोलियरियों में उद्यमियों को कोयला उठाव में परेशानी हो रही है.
दबंगों के कारण कई कोलियरियों में आवंटित कोयले का उठाव नहीं कर पाते. इसकी भरपाई कैसे होगी. हालत यह है कि उठाव न हो पाने के कारण कई कोलियरियों में बेस प्रााइस पर ही कोयले का ऑक्शन हो जाता है. लोग ई ऑक्शन में डर से भाग नहीं लेते. जनप्रतिनिधियों एवं पुलिस प्रशासन की चुप्पी पर भी एसोसिएशन ने सवाल उठाये.
