बरवाअड्डा : झारखंड पेट्रोलियम डीलर एसोसिएशन एवं झारखंड टैंकर ऑनर एसोसिएशन की संयुक्त बैठक रविवार को बरवाअड्डा क्षेत्र के एक होटल में संघ के अध्यक्ष अशोक कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई. हजारीबाग कमिश्नरी एवं संथाल परगना क्षेत्र के दर्जनों पंप एवं टैंकर मालिक शामिल हुए.
बैठक में झारखंड में डीजल पर वर्तमान वैट की दर को कम करने एवं जसीडीह में पेट्रोलियम पदार्थ की माल ढुलाई के टेंडर के विरोध में आंदोलन करने का निर्णय लिया गया. अध्यक्षता करते हुए श्री सिंह ने कहा कि झारखंड में डीजल पर 22 प्रतिशत वैट लिया जा रहा है. वही पड़ोसी राज्य बंगाल में 17 प्रतिशत एवं बिहार में 18 प्रतिशत वैट वहां की सरकार ले रही है.
झारखंड में डीजल पर अधिक वैट होने के कारण बंगाल एवं बिहार से यहां डीजल का रेट 1:25 रुपया पर लीटर अधिक है. इस कारण ट्रक मालिक बंगाल एवं बिहार में ही अपनी गाड़ियों में डीजल भरा लेते है. इससे यहां के पंप मालिकों को व्यवसाय में भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. राज्य के बड़े व्यवसायी भी बंगाल से डीजल मंगा रहे हैं. इस कारण ट्रांसपोर्टरों को काम नहीं मिल रहा है. डीजल, पेट्रोल को जीएसटी के दायरे में लाने की मांग की गयी. कहा गया कि इससे पेट्रोलियम पदार्थो की दर में कमी आयेगी. आमलोगों को भी लाभ होगा. इस संबंध में मुख्यमंत्री से शिकायत करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गयी. संघ अब आक-पार की लड़ाई लड़ेगा.
शरत दुदानी ने कहा कि झारखंड में डीजल पर वैट अधिक होने कारण यहां के पंप बंद होने के कगार पर पहुंच गये है. उपाध्यक्ष कमल सिंह ने कहा कि वैट अधिक होने के कारण पंप मालिकों के साथ टैंकर मालिकों को भी नुकसान हो रहा है. एकजुट होकर लड़ने से हमारी जीत निश्चित है. मौके पर उत्पल मुखर्जी, मासूम परवेज, जितेंद्र सिंह, सदन शर्मा, मोहम्मद अफजल, श्याम कुमार, देव कुमार दत्ता, गौरी शंकर जैन, संजीव उपाध्याय, प्राण सिंह, सुभाष सिंह, प्रवीण सरिया, प्रवीण सिंह, नरेंद्र सिंह समेत दर्जनों पंप मालिक एवं टैंकर मालिक मौजूद थे.
रांची में मौन प्रदर्शन करने का निर्णय : बैठक के अंत में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि डीजल पर लग रहे अधिक वैट के विरोध में जून माह के प्रथम सप्ताह में एक हजार टैंकर के साथ सभी पंप मालिक एवं टैंकर मालिक फिरायालाल चौक से सैनिक बाजार रांची तक मौन प्रदर्शन करेंगे. इसके बाद भी सुनवाई नहीं हुई तो क्रमवार जोरदार तरीके से आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे.
