मनईटांड़ की नीतू पिता के साथ सिटी एसपी से मिली
वर्ष 2008 में राजू सेनगुप्ता से हुई थी शादी
दहेज के लिए मां को बेटे से कर रखा है अलग
पुरुलिया में है मायका
धनबाद : ससुराल वालों के कारण बीते सात सालों से एक मां अपने बेटे से दूर है. मां उसे पाने को थाना और पुलिस अधिकारियों के चक्कर काट रही है. मामला धनसार थाना क्षेत्र के मनईटांड़ का है. पीड़िता नीतू सेनगुप्ता शुक्रवार को सिटी एसपी पीयूष पांडेय से मिली. उसने श्री पांडेय से अपने बेटे से मिलवाने व उसे सौंपने की गुहार लगायी. बताया कि पिछले सात वर्षों से बेटे को पाने को अधिकारियों का दरवाजा खटखटा रही है. आज तक उसे इंसाफ नहीं मिला. कहा कि थाना में इंसाफ नहीं मिलने पर वह उनके शरण में आयी है. सिटी एसपी ने नीतू सेनगुप्ता की बातें गंभीरता से सुनीं और मामले में कार्रवाई का आश्वासन दिया. नीतू का मायका प. बंगाल के पुरुलिया में है.
समझौते के बाद फिर करने लगे प्रताड़ित : नीतू सेनगुप्ता की शादी वर्ष 2008 में मनईटांड़ निवासी राजू सेनगुप्ता के साथ हुई थी. पीड़िता ने बताया कि शादी के एक सप्ताह बाद ही उसके पति राजू, जेठ अजय सेनगुप्ता व सास कांति देवी दहेज के लिए उसे प्रताड़ित करने लगे. वर्ष 2011 में पीड़िता के भाई की शादी के समय ससुराल वालों ने उसे यह कह कर मायके भेजा कि शादी में भाई को पैसे मिले होंगे, वह लेकर आये, तभी उसे ससुराल में रखा जायेगा.
इस दौरान उसके बेटे को उसके साथ नहीं जाने दिया गया. पीड़िता के घरवालों ने वर्ष 2011 में कोर्ट में दहेज उत्पीड़न का मामला दर्ज कराया. करीब डेढ़ साल केस चलने के बाद दोनों पक्षों में समझौता हो गया. पीड़िता ने बताया कि इसके बाद वह अपनी ससुराल आयी. ससुराल एकबार फिर प्रताड़ित करने लगे. नीतू ने बताया कि एक साल के बाद उसे दोबारा सुसराल से निकाल दिया गया. इसी के साथ उसे उसके बेटे से अलग कर दिया गया.
