नीरज सिंह हत्याकांड का एक साल: पूर्णिमा सिंह के चुनाव लड़ने से बढ़ेगा सिंह मैंशन का टेंशन

अगले विस चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर नीरज सिंह की पत्नी पूर्णिमा सिंह के चुनाव मैदान में उतरने की चर्चा है. पार्टी भी चाहती है कि पूर्णिमा ही चुनाव मैदान में उतरे. इससे सहानुभूति वोट मिलने की संभावना है. पूर्णिमा के चुनाव लड़ने की दशा में सिंह मैंशन परिवार के सामने झरिया सीट को […]

अगले विस चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर नीरज सिंह की पत्नी पूर्णिमा सिंह के चुनाव मैदान में उतरने की चर्चा है. पार्टी भी चाहती है कि पूर्णिमा ही चुनाव मैदान में उतरे. इससे सहानुभूति वोट मिलने की संभावना है. पूर्णिमा के चुनाव लड़ने की दशा में सिंह मैंशन परिवार के सामने झरिया सीट को बचाने के लिए कड़ी चुनौती खड़ी होगी.

हालांकि, पिछले एक वर्ष के दौरान एक बार भी पूर्णिमा सिंह किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में नजर नहीं आयी हैं. नीरज सिंह के बाद उनके अनुज अभिषेक सिंह उर्फ गुड्डू ही जनता मजदूर संघ (बच्चा गुट) का कामकाज देख रहे हैं. कांग्रेस की राजनीति में भी अभिषेक एवं उनके मौसेरे भाई हर्ष सिंह सक्रिय हैं. एक खेमा अभिषेक सिंह के भी विधानसभा चुनाव लड़ने का दावा कर रहा है. वैसे परिवार की तरफ से अब तक इस पर कोई फैसला नहीं लिया गया है.

कम समय में कोयलांचल के लोकप्रिय युवा नेता बने थे :वर्षों के दौरान नीरज सिंह ने कोयलांचल की राजनीति में जो लोकप्रियता हासिल की, उसके लिए दो ही शब्द हो सकते हैं-बेजोड़ व बेमिसाल. नीरज कांग्रेस पार्टी से जुड़े थे, लेकिन उनकी लोकप्रियता पार्टी लाइन से ऊपर उठ चुकी थी. कोयलांचल का समाज हो या फिर कोयलांचल की राजनीति, नीरज के दोस्त-ही-दोस्त थे. वर्ष 2010 में नीरज ने धनबाद नगर निगम के डिप्टी मेयर का चुनाव ऐतिहासिक मतों से जीता. इसके बाद अपनी सक्रियता से अपना ऐसा जनाधार तैयार किया, जिसके सामने डिप्टी मेयर की कुरसी छोटी दिखने लगी. बतौर डिप्टी मेयर कई मौकों पर नीरज की लोकप्रियता सांसद व विधायक पर भारी पड़ती दिखी. बड़ी बात यह कि कोयलांचल के ताकतवर राजनीतिक घराने सिंह मैंशन परिवार से आनेवाले नीरज ने धौंसपट्टी की राजनीति से इतर अपनी शालीन राजनीतिक छवि बनायी. बेशक नीरज सिंह के साथ भी सूर्यदेव बाबू का नाम जुड़ा, लेकिन नीरज सिंह ने अपने व्यक्तित्व, अपने व्यवहार, अपनी सक्रियता से अपना अलग से भी मजबूत जनधार तैयार किया. इसका प्रमाण है वर्ष 2010 का नगर निगम चुनाव, जिसमें सिंह मैंशन से मेयर पद के लिए खड़ी इंदू देवी से कहीं अधिक मत लाकर नीरज सिंह डिप्टी मेयर चुने गये. नीरज का हर वक्त मुस्कुराता चेहरा, दोनों हाथ जोड़कर कर सभी का अभिवादन, बिना संकोच बड़ों का पैर छूना, हर किसी से प्यार से मिलना, छोटे-बड़े सभी आयोजनों में उपस्थिति आदि गुणों ने नीरज सिंह को धनबाद कोयलांचल का सबसे लोकप्रिय युवा नेता बना दिया था.

रघुकुल को बनाया “पछिमहा समाज” के लिए राजनीतिक केंद्र : कोयलांचल की राजनीति में सिंह मैंशन के अलावा नीरज सिंह के नेतृत्व में रघुकुल भी बिहार व यूपी के “पछिमहा समाज” के लिए राजनीतिक केंद्र बना. सिंह मैंशन हो या रघुकुल, दोनों का जनाधार एक रहा है. नीरज सिंह की हत्या और संजीव सिंह के आरोपी होने के बाद बीते एक वर्षों से यह सवाल खड़ा है कि “पछिमहा समाज” का राजनीतिक केंद्र कौन होगा? बीती सदी के 70 के दशक में कोयलांचल की राजनीति में जब सूर्यदेव सिंह काबिज हुए, वह दौर झारखंड आंदोलन के परिप्रेक्ष्य में बाहरी-भीतरी की राजनीति का भी दौर रहा. झरिया समेत पूरे धनबाद कोयलांचल और पड़ोस के बोकारो, गिरिडीह से लेकर हजारीबाग तक बाहरी-भीतरी की राजनीति को लेकर उग्र माहौल था. लोटा-सोंटा-झोंटा मार भगाओ जैसे नारे का दौर था. उस दौर में गैर झारखंडी लोगों के लिए सूर्यदेव सिंह ‘गॉड फादर’ बन कर उभरे. सूर्यदेव सिंह को बिहार व यूपी के अलावा पंजाबी, मारवाड़ी, गुजराती समाज के लोगों का भी भरपूर समर्थन मिला. बाद के वर्षों में धनबाद, बोकारो व गिरिडीह जिलों में “पछिमहा समाज” की एकमात्र बड़ी ताकत के रूप में सिंह मैंशन परिवार स्थापित हो गया. सूर्यदेव बाबू ने नाम पर “पछिमहा समाज” के लोग मरने-मारने को तैयार रहते थे. झरिया विधानसभा क्षेत्र में तो बीते चार दशक से सूर्यदेव बाबू के नाम का ही सिक्का चलता रहा. सूर्यदेव बाबू के बाद उनके द्वारा तैयार जनाधार के बूते ही उनके भाई बच्चा सिंह, उनकी पत्नी कुंती देवी या फिर उनके पुत्र संजीव सिंह विधायक बनते रहे. इसमें एक बड़ा बदलाव तब आया, जब कोयलांचल की राजनीति में नीरज सिंह सक्रिय हुए.

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