मधुपुर. शहर के पंच मंदिर रोड स्थित दुर्गा मंदिर प्रांगण में चल रहे नवाह्न परायण यज्ञ व श्रीराम कथा के तीसरे दिन कथा में प्रभु श्रीराम के जन्म की कथा सुनाया गया. कथा वाचक मधुसूदन शास्त्री ने असुरों द्वारा लोगों को प्रताड़ित करना, देवताओं और माता पृथ्वी का क्रंदन, भगवान विष्णु का अवतार लेने व असुरों का नाश करने के वचन को बड़े ही आकर्षक शैली में प्रस्तुत किया. बताया कि संत शिरोमणि तुलसीदास जी ने अपने श्रीरामचरितमानस में बड़ा ही सुंदर वर्णन किया है नौमी तिथि मधुमास पुनीता सुकल पच्छ अभिजीत हरि प्रीता, मध्य दिवस अति सीत न घामा, वन काल लोक विश्रामा ऐसे मंगल ग्रहों की उपस्थिति में भगवान श्री राम ने महाराज दशरथ की नगरी अयोध्या में अवतार ले लिया. चूंकि प्रभु का अवतार असुरों के विनाश के लिए हुआ. उन्होंने महल के आंगन में नर लीलाएं की और तीनों माताओं को तीनों अन्य भाइयों सहित रोमांचित, प्रफुल्लित और आनंदित किया. कथावाचक ने कई प्रासंगिक भजन और सोहर गाकर राम जन्म की कथा को मंत्र मुग्ध कर दिया और श्रोताओं के बीच से जय श्री राम, जय श्री राम की ध्वनि गूंजती रही. हमारे प्रभु राम हमें ऐसे ही आनंदित और सफल बनाते रहेंगे. अगर उनका ध्यान हम हमेशा करते रहे. उनके नाम का संकीर्तन करते रहे. हमारे सारे पाप कट जाएंगे और जो पुण्य पल्लवित होगा वह हमारी आने वाली पीढियां के लिए भी वरदान होगा. बहुत सरल और छोटा अपने प्रभु का नाम है और इसमें न साज की जरूरत है ना आवाज की जरूरत है तो सिर्फ मन में उनको धारण करने की. नाम संकीर्तन और ध्यान हमें बुरे विचारों और बुरे कर्मों से हटा देगा. हमारा जन्म सफल हो जाएगा एक बार इनका होके तो देखिये. मौके पर दर्जनों महिला- पुरुष श्रद्धालु मौजूद थे.
आज अयोध्या में मचल बा धमाल सखियां...सुनकर भावविभोर हुए श्रोता
मधुपुर के पंच मंदिर रोड के दुर्गा मंदिर प्रांगण में धार्मिक अनुष्ठान आयोजित
