बाबा बैद्यनाथ को चढ़ा तिलक, लगा गुलाल, देवघर से मिथिला तक उत्सव, मिथिलांचल में होली शुरू

आम के मंजर, मालपुआ सहित अन्य प्रकार के प्रसाद चढ़ाकर आरती के साथ तिलक पूजा संपन्न की गयी. परंपरा के अनुसार, तिलक पूजा संपन्न होने के बाद पुजारी प्रमोद शृंगारी दोबारा गर्भगृह में प्रवेश किये.

बसंत पंचमी के अवसर पर झारखंड के देवघर जिला स्थित बाबा बैद्यनाथ मंदिर इस्टेट की ओर से बाबा को तिलक चढ़ाया गया. तिलक चढ़ते ही तिलकहरुओं में उत्सव छा गया. मिथिलांचल में होली शुरू हो गयी. बुधवार को लक्ष्मी नारायण मंदिर में पुजारी सरदार पंडा श्रीश्री गुलाब नंद ओझा की मौजूदगी में आचार्य श्रीनाथ पंडित व उपचारक भक्तिनाथ फलहारी ने पुजारी प्रमोद शृंगारी से तिलक पूजा करायी.

इस अवसर पर आम के मंजर, मालपुआ सहित अन्य प्रकार के प्रसाद चढ़ाकर आरती के साथ तिलक पूजा संपन्न की गयी. परंपरा के अनुसार, तिलक पूजा संपन्न होने के बाद पुजारी प्रमोद शृंगारी दोबारा गर्भगृह में प्रवेश किये.

बाबा को चंदन लगाने के बाद चांदी की थाली में रखा गुलाल अर्पित किया गया. इसके साथ ही गर्भगृह से मंदिर परिसर तक हर-हर महादेव के जयघोष गूंजने लगे. गुलाल चढ़ाने की यह परंपरा फाल्गुन मास की पूर्णिमा तक जारी रहेगी.

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बसंत पंचमी के अवसर पर काल भैरव मंदिर में एवं बाबा को गुलाल अर्पित करने के बाद मंदिर परिसर सहित अन्य जगहों पर तिलकहरुओं ने जमकर गुलाल उड़ाया. मंदिर परिसर सहित आसपास ठहरे बिहार के मिथिलांचल क्षेत्र के अलावा मिथिला से सटे नेपाल से आये भक्तों ने एक दूसरे को गुलाल लगाये.

तिलक एवं होली की बधाई देकर फाग गीत गाने की परंपरा शुरू हो गयी. बाबा की तिलक पूजा में बिहार के दरभंगा, मधुबनी, सीतामढ़ी, सहरसा, पूर्णिया, कटिहार, बेगूसराय मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर सहित नेपाल के जनकपुर तराई व अन्य जगहों से बड़ी तादाद में श्रद्धालु पहुंचे थे.

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माघ मास शुक्ल पक्ष बसंत पंचमी पर मंत्रोच्चार के बीच बाबा बैधनाथ का तिलकोत्सव हुआ. 23 दिन बाद आठ मार्च को को महाशिवरात्रि के उपलक्ष्य में बाबा और मां पार्वती का विवाह होगा. बुधवार को बसंत पंचमी के अवसरपर बाबा बैद्यनाथ की पूजा व जलार्पण करने के लिए बड़ी तादाद में शिवभक्त उमड़े.

इनमें मिथिलांचल और नेपाल के भक्तों की तादाद अधिक थी. बाबा की तिलक पूजा में शामिल होने वाले भक्तों व स्थानीय श्रद्धालुओं को मिलाकर दो दिनों में करीब दो लाख से अधिक लोगों ने जलार्पण किया. अहले सुबह से ही पूरा बाबा मंदिर परिसर मिथिलांचल के भक्तों से पटा रहा.

मंदिर का पट सुबह तीन बजकर पांच मिनट पर खुला. सरदार पंडा श्रीश्री गुलाब नंद ओझा ने षोडशोपचार विधि से बाबा की सरदारी पूजा की. महंत ने मलमल के कपड़े से बाबा बैद्यनाथ के ज्योतिर्लिंग को साफ किया.

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वैदिक मंत्रोच्चार के बीच बाबा पर कांचा जल चढ़ाया गया. इसके बाद तीर्थ पुरोहितों ने बाचा पर कांचा जल चढ़ाया, सरदारी पूजा के बाद पट खुलते ही भक्तों में उत्साह भर गया. इस अवसर पर भक्तों की कतार तकरीबन चार से पांच किलोमीटर लंबी हो गयी. 4380 भक्तों ने शीघ्रदर्शन कूपन लेकर पूजा की.

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By Mithilesh Jha

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