मधुपुर. शहर के भेड़वा नावाडीह स्थित राहुल अध्ययन केंद्र में रविवार को शायर निदा फाजली की जयंती व डॉ राममनोहर लोहिया की स्मृति दिवस मनाया गया. उपस्थित लोगों ने दोनों विभूतियों की तस्वीर पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किया. इस अवसर पर धनंजय प्रसाद ने कहा कि निंदा फाजली की शायरी भारतीय लोक संवेदना से सीधे जुड़ती है. उनका खड़ी बोली के साथ रचनात्मक लगाव रहा है. हिन्दी व उर्दू के जदीद शायरों ने हिन्दी व उर्दू की दीवार ढाहने का काम किया, जिसमें निंदा फ़ाज़ली का नाम सबसे पहले लिया जाएगा. उन्होंने कहा कि डॉ राममनोहर लोहिया सोशलिस्ट के प्रमुख नेताओं में से एक थे. जो सप्त क्रांति व चौखम्भा सिद्धांत के प्रणेता थे. उन्होंने ही सत्ता से सवाल करना सीखाया. सत्ता के विरुद्ध जनता को गोलबंद करने के लिए सतत आन्दोलित रहे हैं. वो हमेशा समाज और सरकार को एक साथ, एक रास्ते पर और एक समान बनाने के लिए प्रयासरत रहे हैं. वो ऊंचे कोटी के विचारक, आंदोलनकारी, राजनीतिज्ञ, सामाजिक क्रांति व सप्तक्रांति के प्रोद्धा थे. व निजी आजादी के सबसे बड़े पैरोकार थे. मौजूदा समय में उनके अनुयायियों ने उनके विचार व सिद्धांत के विपरित आचारण व व्यवहार कर रहे है. डॉ राममनोहर लोहिया सोशलिस्ट के अग्रणीय नेताओं में से एक थे. जो सप्त क्रांति और चौखम्भा सिद्धांत के प्रणेता थे. उन्होंने ही सत्ता से सवाल करना सीखाया और सत्ता के विरुद्ध जनता को गोलबंद करने के लिए सतत आन्दोलित रहे है. वे हमेशा समाज और सरकार को एक साथ , एक रास्ते पर और एक समान बनाने के लिए प्रयासरत रहे है. वे ऊंचे कोटी के विचारक, आंदोलनकारी, राजनीतिज्ञ, सामाजिक क्रांति व सप्तक्रांति के प्रोद्धा थे व निजी आजादी के सबसे बड़े पैरोकार थे. इसके अलावा अन्य लोगों ने भी अपने विचार व्यक्त किये. हाइलार्ट्स : शायर निदा फाजली की जयंती व डॉ राममनोहर लोहिया का मनाया गया स्मृति दिवस
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
