देवघर: मोहनपुर अंचल स्थित हरिलाजोड़ी गांव में पहाड़िया आदिम जनजाति हीरालाल पुजहर कभी पांच एकड़ जमीन का खतियानी मालिक था. हीरालाल पुजहर सालों अपनी जमीन में धान के साथ-साथ तेलहन व दलहन की खेती करते थे. लेकिन आज खतियान में हीरालाल के नाम से पांच एकड़ जमीन तो दर्ज है, लेकिन उसके कब्जे में एक एकड़ जमीन भी नहीं बचा है.
हीरालाल के परिवार के पास महज 80 डिसमिल जमीन बचा है. इसमें भी दूसरा भाई बिरजु पजहर का भी परिवार आश्रित है. पांच एकड़ जमीन का मालिक हीरालाल आज अपनी ही जमीन से बेदखल होकर दूसरों के खेत में भरण-पोषण के दिहाड़ी मजदूरी करता है. हीरालाल का चार एकड़ से अधिक जमीन पर भू-माफियों ने जैसे-तैसे कब्जा जमा लिया. कब्जा जमाने वाले भू-माफियों ने बाद में हीरालाल की जमीन को हीरा के भाव में बेचकर पैसा बनाया.
हीरा के जमीन पर बिहार के लोगों ने आकर आलिशान मकान तक बना लिया, लेकिन हीरा का परिवार आज दर-दर ठोकर खाने को विवश है. माफियों ने क्रशर के नाम पर हीरा से जमीन लिया व इसे बेचना शुरू कर दिया. हीरा ने अपनी जमीन बचाने के लिए सोमवार को एसडीओ जय ज्योति सामंता से गुहार लगायी थी, लेकिन तीन दिनों बाद भी इसमें सीओ व थाना प्रभारी से कोई कार्रवाई नहीं हुई है. सरासनी पंचायत की मुखिया प्रमीला देवी कहती है कि हीरालाल पहाड़िया आदिम जनजाति है, उसकी जमीन वापस दिलाने के लिए एसटी/एससी आयोग(नई दिल्ली) को पत्र लिखा जायेगा. इस परिवार की रक्षा के लिए पंचायत खुलकर आगे आयेगी.
