रहमतों व बरकतों का पाक महीना है ''माह-ए-रमजान''

मधुपुर : रमजानुल मुबारक इस्लामिक साल का मुबारक महीना है. इस माह में अल्लाह ताला ने तमाम रहमतों व बरकतों को दिया है. यह बातें मौलाना अजमल नूरी ने कही. उन्होंने कहा कि इस माह में नफील नमाज का फर्ज नमाज के बराबर दिया जाता है व फर्ज नमाज का शबाब 70 गुणा अधिक दिया […]

मधुपुर : रमजानुल मुबारक इस्लामिक साल का मुबारक महीना है. इस माह में अल्लाह ताला ने तमाम रहमतों व बरकतों को दिया है. यह बातें मौलाना अजमल नूरी ने कही. उन्होंने कहा कि इस माह में नफील नमाज का फर्ज नमाज के बराबर दिया जाता है व फर्ज नमाज का शबाब 70 गुणा अधिक दिया जाता है. जिस व्यक्ति की इस माह में मौत हो जाती है.
उसकी कब्र में कोई सवाल-जवाब नहीं होता है. इस माह में तरावीह की नमाज इशा के नमाज के बाद हर मोमिन को सुनना एवं हाफिज कुरान के पीछे पढ़ना सुन्नते मौकदा है. इस माह में इफ्तार के वक्त जो रोजेदारों द्वारा दुआ की जाती है, वह अल्लाह के दरबार में कबूल होती है. खजूर व पानी से इफ्तार खोलना सुन्नत है. सरकार ने फरमाया कि जिस व्यक्ति ने एक रोजेदार को पानी पिलाया तो उस व्यक्ति को गुनाहों से ऐसे माफ कर दिया जायेगा, जैसे उसने अपनी मां की कोख से आज ही जन्म लिया हो.
मौलाना अजमल नूरी ने कहा
मौलाना अजमल नूरी ने कहा कि ऐसे लोगों से मुसाफत करते हैं, सेहरी के लिए नबी ने फरमाया कि सेहरी करना कुल की कुल बरकत है. चाहे वह एक घूंट पानी ही क्यों न हो. सेहरी करने वालों पर अल्लाह व उनके फरिश्ते रहमत भेजते हैं. रमजान के महीने मेंं रब ने तीन असरा बनाये हैं. इसमें पहला असरा 10 दिनों का होता है. इस असरे में हर बंदा-ए-मोमिन को अधिक से अधिक वफादारी करनी चाहिए. झूठ, चुगलखोरी व फिल्म देखने से बचने की कोशिश करनी चाहिए. जो नमाज छूट गयी है, वह नफील नमाज की जगह पढ़नी चाहिए.

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