Chatra Teacher News, चतरा (दीनबंधू/धनश्याम की रिपोर्ट): चतरा जिले के गिद्धौर प्रखंड मुख्यालय स्थित प्लस टू गंगा स्मारक उच्च विद्यालय में पदस्थापित हिंदी शिक्षक डॉ. राजीव कुमार दास ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है. डॉ. दास ने प्रतिष्ठित ‘यूएन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में अपना नाम दर्ज कराकर तीसरा विश्व रिकॉर्ड हासिल किया है. अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित इस संस्था द्वारा उनके नाम की घोषणा के बाद से ही विद्यालय के शिक्षकों, छात्र-छात्राओं और स्थानीय निवासियों के बीच जश्न का माहौल है. उनकी इस उपलब्धि ने साबित कर दिया है कि संकल्प और साधना से ग्रामीण परिवेश में रहकर भी वैश्विक पहचान बनाई जा सकती है.
मां भवानी के नौ रूपों की साहित्यिक प्रस्तुति
मिली जानकारी के अनुसार, वासंतिक नवरात्र के पावन अवसर पर डॉ. दास ने अपनी विशिष्ट साहित्य साधना के माध्यम से मां भवानी के नौ रूपों का अद्भुत और विस्तृत वर्णन एक लंबी रचना में किया. इस रचना की गहराई और भाषाई सौंदर्य को देखते हुए न्यूयॉर्क की संस्था ने इसे विश्व रिकॉर्ड के रूप में स्वीकार किया है. डॉ. दास की यह रचना भक्ति और साहित्य का एक अनुपम संगम मानी जा रही है, जिसने जूरी का ध्यान आकर्षित किया.
Also Read: गंभीर बीमारी से जूझ रहे दुमका के 11 लोगों को मिली 3.30 लाख की मदद, सांसद नलिन सोरेन ने दिया चेक
रिकॉर्ड्स की हैट्रिक और गौरवशाली अतीत
डॉ. राजीव कुमार दास के लिए यह पहला अवसर नहीं है जब उन्होंने दुनिया को अपनी लेखनी से चकित किया हो. इससे पहले भी वे दो बड़े अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड अपने नाम कर चुके हैं. इससे पहले भगवान कृष्ण पर आधारित उनके काव्य के लिए उन्हें ‘लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ से सम्मानित किया गया था. इसके अलावा (राम काव्य) प्रभु श्री राम के जीवन दर्शन पर लिखी रचना के लिए उनका नाम ‘गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में दर्ज हुआ था.
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सम्मान
डॉ. दास की ख्याति केवल रिकॉर्ड्स तक सीमित नहीं है. उन्हें हिंदी साहित्य लेखन के उत्कृष्ट योगदान के लिए भारत सरकार सहित कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सम्मानित किया जा चुका है. वे देश-विदेश के कवि सम्मेलनों और मुशायरों के एक लोकप्रिय चेहरा हैं, जहां वे राष्ट्रप्रेम, राष्ट्रीय एकता और सामाजिक जागरूकता जैसे संवेदनशील विषयों पर अपनी ओजस्वी रचनाएं प्रस्तुत करते हैं.
Also Read: गढ़वा में पलायन का दंश! हैदराबाद में एक और मजदूर की मौत, एक हफ्ते में दो घरों के बुझा चिराग
