पक्के घरों से बदली गांवों की तस्वीर, प्रधानमंत्री और अबुआ आवास योजना से साकार हुआ ग्रामीणों का सपना

प्रधानमंत्री और अबुआ आवास योजना ने ग्रामीण भारत की तस्वीर बदल दी है. अब गांवों में मिट्टी के घरों की जगह पक्के और सुंदर मकान ले रहे हैं. पूरी जानकारी पढ़ें.

मयूरहंड़. केंद्र सरकार की महत्वकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना व राज्य सरकार की महत्वकांक्षी अबुआ आवाज़ योजना ने गांवों की सूरत बदल दी है. पांच से सात साल पहले ग्रामीण क्षेत्र के गांवों में केवल मिट्टी के घर दिखाई देते थे. वहां आज केवल पक्के के घर ही दिखाई देते हैं. पहले की अपेक्षा अब गांवों में भी मिट्टी के घर गिने-चुने लोगों के ही दिखाई देते हैं.

प्रधानमंत्री आवास (प्राक्कलित राशि लगभग डेढ़ लाख) व आबुआ आवास (प्राक्कलित राशि लगभग ढाई लाख) से मिलने वाली राशि न सिर्फ लोगों को एक सहायता दी है, बल्कि एक सुंदर घर बनाने की दिशा में ऊर्जा दी है. जिन-जिन लाभुकों को राशि मिली है, वे लाभुकों ने सरकार से मिली राशि के अलावें अपने-अपने कमाई के रुपये लगाकर घर को बेहतर, बड़ा, सुंदर व आकर्षक बनाने का काम किया है. ग्रामीण क्षेत्र में आवास योजना से वैसे ग्रामीणों को प्रेरणा मिली है, जिन्हें आवास योजना का लाभ नहीं मिला है. वे ग्रामीण भी अपनी निजी राशि से तेजी से अपना घर निजी बना लियें हैं, कई लोगों के सरकार व निजी घर का निर्माण कार्य जारी है.

अब तक इतने लोगों को मिला आवास का लाभ.

मयूरहंड प्रखंड में केंद्र सरकार द्वारा संचालित प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 3613 लाभुक (2026 से वित्तीय बर्ष तक), प्रधानमंत्री जन-मन योजना के अंतर्गत 38 व झारखंड सरकार द्वारा संचालित अबुआ आवास योजना के अंतर्गत 1524 (वित्तीय वर्ष 2023-24 व 2024-25) अंबेडकर आवास योजना के अंतर्गत 199 का लाभ लाभुकों को मिला है.

क्या कहते हैं लाभुक

लाभुक मसोमात किरण देवी ने कहा कि मुझे प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिला है. राशि कम जरूर मिला है, लेकिन घर से और अपनी कमाई की राशि लगाकर रहने के लिये बेहतर घर का निर्माण कर रही हूं. गुंजा देवी व कपुरवा देवी ने कहा कि सरकार से सहायता मिलने के बाद घर बनाने का सपना साकार हुआ है. चिंता देवी ने कहा कि मुझे घर बनाने के लिये कोई राशि नहीं थी, आवास का राशि मिली तो घर बनाने का बनाई हूं. अबुआ आवास के लाभुक मयूरहंड निवासी उमा देवी ने बताई कि राज्य सरकार के आबुआ आवास योजना का मुझे लाभ मिला. उसके बाद मैं अपना पक्का घर पाई हूं. पहले मिट्टी का घर था.

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लेखक के बारे में

By पिंटू कुमार राणा

पिंटू कुमार राणा वर्ष 2010 से प्रभात खबर के साथ बतौर संवाददाता जुड़े हुए हैं. मयूरहंड क्षेत्र में पत्रकारिता के दौरान वे शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी, सिंचाई, व्यापार और राजनीति से जुड़े जनहित के मुद्दों को प्रमुखता से उठाते रहे हैं. ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं को सामने लाने और आम लोगों की आवाज को उचित मंच तक पहुंचाने में उनकी सक्रिय भूमिका रही है.

पिंटू कुमार राणा का मुख्य उद्देश्य पत्रकारिता के माध्यम से समाज में जागरूकता लाना, जनसमस्याओं को सामने लाना और संबंधित स्तर तक उनकी आवाज पहुंचाना है. स्थानीय मुद्दों की जमीनी पड़ताल और जनहित से जुड़े विषयों को प्राथमिकता देना उनकी पत्रकारिता की खास पहचान है.

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