Chaibasa News : आज भी गूंजती है 25 किलो की इंग्लिश घंटी

छोटानागपुर सीएनआइ कलीसिया का सबसे पुराना चर्च, 1880 में रखी गयी थी नींव

चाईबासा.

छोटानागपुर डायसिस का सर्व संत उपासनालय (सीएनआइ चर्च) इस क्षेत्र का सबसे पुराना चर्च है. इसकी नींव 30 नवंबर 1880 को रखी गयी थी और वर्ष 1885 में इसका निर्माण पूरा हुआ. तब से लेकर आज तक मसीही समुदाय के लोग यहां प्रभु यीशु मसीह की आराधना करते आ रहे हैं. सीएनआइ (चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया) का इतिहास छोटानागपुर क्षेत्र में इसाई मिशनरियों की गतिविधियों से गहरायी से जुड़ा हुआ है. इस गिरजाघर का क्षेत्र विस्तृत है. यहां इंग्लैंड निर्मित लगभग 25 किलोग्राम वजनी घंटी लगी है, जिसकी ध्वनि दूर-दूर तक सुनायी देती है. कहा जाता है कि वर्षों से केवल घंटी की रस्सी बदली जाती रही है.

800 लोगों के बैठने की व्यवस्था

गिरजाघर में लगभग 700 से 800 लोगों के बैठने की व्यवस्था है. वर्तमान में चर्च के करीब 1200 विश्वासी सदस्य हैं. बताया जाता है कि 19वीं सदी के मध्य में जर्मन मिशनरियों ने यहां आकर शिक्षा, स्वास्थ्य और धर्मप्रचार के कार्य शुरू किए, जिससे स्थानीय चर्चों का विकास हुआ. जीइएल चर्च के बाद सीएनआइ चर्च इस मिशनरी प्रयासों का प्रमुख अंग बना. इसाई धर्म और आदिवासी संस्कृति के समन्वय में इस चर्च ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी, जिससे स्थानीय समुदायों का सामाजिक और धार्मिक उत्थान हुआ.

दो संडे स्कूल संचालित

सीएनआइ पेरिस के अंतर्गत दो संडे स्कूल संचालित हैं, एक एसपीजी मिशन बालक स्कूल परिसर में और दूसरा चाईबासा के गुटुसाई में जीकेटी संडे स्कूल के नाम से. इन स्कूलों में बच्चों को बाइबल के साथ-साथ अन्य विषयों की शिक्षा दी जाती है. खेल, नाटक और गीत-संगीत के माध्यम से उन्हें धार्मिक और नैतिक मूल्यों से परिचित कराया जाता है. साथ ही, चर्च में पेरिस कमेटी, महिला कमेटी और युवा कमेटी सक्रिय हैं. महिला कमेटी महिला सशक्तीकरण के कार्यों में लगी हैं, जबकि युवा कमेटी युवाओं के विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है.

2021 में शुरू हुई महिला पादरी की नियुक्ति की परंपरा

यह चर्च केवल मसीही आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि शिक्षा और सामाजिक विकास की भी आधारशिला रहा है. वर्ष 2021 से यहां महिला पादरी नियुक्त करने की परंपरा शुरू हुई, जिसके तहत अब तक तीन महिला पादरियों की नियुक्ति हो चुकी है. वर्तमान में एसपीजी मिशन छात्रावास के वार्डेन अनिल दादेल की पुत्री जेनीफर दादेल पादरी प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं.

स्थापना काल से अब तक बने 44 पादरी

स्थापना काल से अब तक इस गिरजाघर में कुल 44 पादरी बन चुके हैं. चर्च के पहले पादरी रेव्ह. डब्ल्यू. एलडी सिंह थे. वर्तमान में रेव्ह. रविकेश मनोज नाग पादरी हैं. सहयोगी पुरोहित अमृत मसीह चरण मुंडू, प्रचारक मर्शल हासा पुरती, सचिव सत्येंद्र पुरती और कोषाध्यक्ष संजय शिशिर बोयपाई हैं.

क्रिसमस की तैयारी जोरों पर

वर्तमान में मसीही समुदाय क्रिसमस पर्व की तैयारी में जुटा है. रेव्ह. रविकेश मनोज नाग ने बताया कि 24 दिसंबर को शाम 5 बजे और रात्रि 11 बजे, जबकि 25 दिसंबर की सुबह 7 बजे क्रिसमस उत्सव को लेकर विशेष प्रार्थना सभा आयोजित की जायेगी. पर्व को लेकर मसीही समाज में उत्साह चरम पर है.

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Author: ATUL PATHAK

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