बोकारो में इएसआइ का अपना अस्पताल नहीं है. इससे इएसआइ से संबद्ध लगभग छह लाख (एक लाख 30 हजार कामगार व उनके परिजन लगभग साढ़े चार लाख) लोग प्रभावित हो रहे हैं. इएसआइ अस्पताल खोलने की मांग वर्षों से हो रही है. समय पर श्रमिक नेता आवाज उठाते रहे हैं. आश्वासन मिलता है. इसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है. सेक्टर चार सिटी सेंटर में एक बीमा डिस्पेंसरी (ओपीडी) चल रहा है. यहां चिकित्सक के चार पद स्वीकृत हैं, लेकिन फिलहाल एक चिकित्सक डॉ रणधीर कुमार सिंह हैं. डिस्पेंसरी में केवल शुगर और बीपी जांच की व्यवस्था है. गायनिक, अर्थोपेडिक, इएनटी, आंख सहित गंभीर मरीज को रेफर करने के अलावे चिकित्सक के पास कोई उपाय नहीं है. फिलहाल डिस्पेंसरी में तीन स्थायी व 12 अस्थायी कर्मचारी कार्यरत हैं.
हर दिन 160 मरीजों का इलाज
बीमा डिस्पेंसरी में प्रतिदिन 160 से अधिक मरीजों का इलाज होता है. विशेषज्ञ चिकित्सक के अभाव में प्रतिदिन लगभग 30 से 35 मरीजों को रेफर किया जाता है. प्रतिदिन 15 गंभीर मरीजों को इएसआइ से संबद्ध अस्पतालों (केएम मेमोरियल अस्पताल चास, मुस्कान अस्पताल चास, नीलम अस्पताल चास, पांडा हॉस्पिटल चीरा चास व जैन अस्पताल सेक्टर आठ) में इलाज के लिए दाखिल किया जाता है. इसके अलावे इएसआइ के रांची या जमशेदपुर अस्पताल रेफर किया जाता है. इससे परिजनों को काफी परेशानी होती है. ऐसे कई लोग खुद के पैसे से इलाज कराने को विवश होते हैं.
कई बार हुई घोषणा
दो अप्रैल 2018 को देवघर के समीप इएसआइसी अस्पताल की नींव रखने की घोषणा पूर्व केंद्रीय श्रम मंत्री बंगारू दत्तात्रेय ने की थी. बताया था कि बोकारो में 100 बेड का इएसआइसी खुलेगा. वर्ष 2024 में घोषणा हुई कि चास मुफस्सिल क्षेत्र के पुपुनकी के समीप 25 एकड़ में इएसआइ अस्पताल का निर्माण होगा. आज तक जगह तलाशी नहीं जा सकी. जबकि रांची, जमशेदपुर, मधुपुर, गिरिडीह, कोडरमा, रामगढ़, धनबाद में इएसआइसी अस्पताल है.
बोकारो में कामगारों की संख्या एक लाख 60 हजार से पार
वर्तमान में बोकारो में इएसआइसी से संबद्ध कामगारों की संख्या लगभग एक लाख 60 हजार पार कर गयी है. ये सभी बीएसएल, ओएनजीसी, एसआरयू मुख्यालय, डालमिया सीमेंट फैक्ट्री, दर्जनों मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों व छोटी-मध्यम इकाइयों में कार्यरत हैं. इसके अलावे 30 किमी के परिधि में सीसीएल बेरमो, आइइएल गोमिया, डीवीसी की चंद्रपुरा व बोकारो थर्मल में दो-दो बड़े पावर प्लांट, वेदांता स्टील प्लांट में कार्यरत ठेका मजदूर व अल्प वेतनभोगी कर्मचारी जुड़े हुए हैं.
