Bokaro News : बोकारो और बेरमो को जोड़ने वाला पुल जर्जर

Bokaro News : बोकारो और बेरमो को जोड़ने वाला पुल जर्जर है.

पिछले दिनों खबर बिहार से आयी कि भागलपुर में विक्रमशिला पुल

का करीब 25 मीटर स्लैब गिर गया. स्लैब गिरने से पहले पुल

में दरार देखी जा रही थी, जिसे शुरुआती दौर में नजरअंदाज किया गया. कुछ ऐसी ही स्थिति बोकारो जिला के प्रमुख पुलों में से एक दामोदर नदी पर बने हिंदुस्तान पुल

की है. कोयलांचल को स्टील नगरी से जोड़ने वाले इस पुल

के खंभों के कई बेयरिंग टूट रहे हैं. कई में बड़ी दरारें आ गयी हैं. लेकिन इस पर प्रशासन अभी तक सचेत स्थिति में नजर नहीं आ रहा है. जबकि प्रभात खबर के 20 जनवरी के अंक में पुल

की स्थिति पर खबर प्रकाशित की गयी थी. उस समय प्रशासन की ओर से निरीक्षण की बात कही गयी थी. लेकिन, अभी तक पुल

की मरम्मत की दिशा में कुछ नहीं हुआ. जबकि, खंभा में दरार बढ़ी है.दशकों पहले इस पुल

का निर्माण पांच दशक की कार्ययोजना को देखते हुए कराया गया था. लेकिन, वर्तमान में वाहनों की वजन क्षमता अधिक हो गयी है. इसके कारण पुल

पर भार पड़ता है. खंभा व डेक के बीच स्थापित बेयरिंग, जो तापमान बदलाव या कंपन के कारण होने वाले मूवमेंट को समायोजित करता है, उस पर इस वजन का असर हो रहा है. बेयरिंग टूट रहा है. अब तक पुल की सिर्फ ऊपरी स्तर पर ही मरम्मत कार्य किया गया है. हाल के दिनों में भी ऊपर से ही फेबरिकेशन हुआ है. पुल

की ऊपरी स्तर पर मरम्मत के कारण कंपन डिस्ट्रीब्यूशन पर भी असर हो रहा है. पुल

सिर्फ वाहन या इंसानी आवागमन का ही जरिया नहीं, बल्कि कई विभाग का भार भी ढो रहा है. बिजली विभाग का वजनी केबल भी पुल

से ही गुजारा गया है.

लाखों की आबादी व करोड़ों का कारोबार का जरिया है यह पुल

हिंदुस्तान पुल

की महत्ता इससे समझी जा सकती है कि इससे

लाखों लोग सीधे तौर पर जुड़े हैं. बोकारो इस्पात संयंत्र, ओएनजीसी, इंडियन ऑयल, एचपीसीएल जैसे पीएसयू व इलेक्ट्रोस्टील-वेदांता कंपनी के उत्पाद को बाजार तक पहुंचाने का रास्ता इसी पुल

से गुजरता है. वहीं सीसीएल से बोकारो रेलवे यार्ड तक कोयला भी इसी पुल

से होकर पहुंचता है. एक दिन में पुल

से होकर करोड़ों का कारोबार होता है. वहीं, राजधानी रांची को उप राजधानी दुमका से जोड़ने वाला रास्ता भी इसी पुल

से होकर जाता है.

लाखों की आबादी इस पुल

का इस्तेमाल हर दिन करती है.

1957 में शुरू हुआ था पुल का निर्माण

हिंदुस्तान पुल

का निर्माण वर्ष 1957 में शुरू हुआ और 1961 में आवागमन शुरू हो गया. इस पुल

के निर्माण के समय यह क्षेत्र हजारीबाग जिले का हिस्सा हुआ करता था. 11 खंभों वाले इस पुल

का निर्माण कार्य तीन वर्षों तक चला. 1960 में यह पुल

बन कर तैयार हुआ. पुल

का निर्माण हिन्दुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी ने किया. इसी कारण यह हिन्दुस्तान पुल

के नाम से प्रसिद्ध हुआ. 90 के दशक में बिहार राज्य पुल

निर्माण निगम द्वारा यहां बड़े वाहनों से टोल टैक्स भी वसूला जाता था.

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Published by: Janak singh choudhary

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