बोकारो. मोबाइल, लैपटॉप, डेस्कटॉप और टेलीविजन का बढ़ता उपयोग बच्चों की आंखों पर गंभीर असर डाल रहा है. कोविड-19 महामारी के दौरान शुरू हुई ऑनलाइन पढ़ाई और डिजिटल उपकरणों पर बढ़ी निर्भरता का प्रभाव आज भी दिखाई दे रहा है. नेत्र रोग विशेषज्ञों के अनुसार, आंखों से जुड़ी समस्याओं के साथ अस्पताल और क्लीनिक पहुंचने वाले बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है.
बोकारो में प्रतिदिन लगभग 450 नेत्र रोगियों की जांच की जाती है. वहीं एक नेत्र विशेषज्ञ की ओपीडी में रोजाना 30 से 35 मरीज आंखों की समस्या लेकर पहुंचते हैं, जिनमें 20 से 22 बच्चे शामिल होते हैं. जांच के दौरान अधिकांश बच्चों में दूर या नजदीक देखने में परेशानी, आंखों से पानी आना, जलन, आंखों का सूखापन तथा देर से पलक झपकाने जैसी शिकायतें सामने आ रही हैं.
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ऑनलाइन पढ़ाई और मोबाइल का बढ़ता उपयोग बना कारण
कोविड काल में स्कूल बंद होने के बाद ऑनलाइन पढ़ाई विद्यार्थियों के लिए एकमात्र विकल्प बन गयी थी. हालांकि, इसका दुष्प्रभाव अब सामने आने लगा है. विशेषज्ञों का कहना है कि कई-कई घंटे तक मोबाइल स्क्रीन पर नजर टिकाये रखने से बच्चों की आंखों में ड्राईनेस बढ़ रही है. पढ़ाई के अलावा बच्चे लंबे समय तक मोबाइल गेम, वीडियो और सोशल मीडिया का भी इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे आंखों पर दबाव बढ़ रहा है.
बदलती जीवनशैली भी जिम्मेदार
विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों से लेकर बड़ों तक की जीवनशैली में तेजी से बदलाव आया है. टीवी, मोबाइल और कंप्यूटर का अत्यधिक उपयोग आंखों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है. पहले उम्र बढ़ने के साथ दिखाई देने वाली कई समस्याएं अब कम उम्र में भी सामने आने लगी हैं. लंबे समय तक स्क्रीन देखने से डिजिटल आई स्ट्रेन, आंखों का थकान, सिरदर्द और दृष्टि संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं.
आउटडोर गतिविधियों से दूरी का असर
कोरोना काल के बाद बच्चों का अधिकांश समय घरों के अंदर और डिजिटल उपकरणों के साथ बीतने लगा है. इससे न केवल आंखों पर असर पड़ा है, बल्कि बच्चों के व्यवहार और मानसिक स्वास्थ्य पर भी प्रभाव देखने को मिल रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि आउटडोर खेलों से दूरी और अत्यधिक स्क्रीन टाइम के कारण बच्चों में चिड़चिड़ापन, एकाग्रता की कमी और व्यवहारगत बदलाव भी देखे जा रहे हैं.
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
सरकारी अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. श्रीनाथ के अनुसार, मोबाइल स्क्रीन का आकार छोटा होने के कारण बच्चे पढ़ाई के दौरान आंखों पर अधिक दबाव डालते हैं. इससे आंखों में जलन, दर्द, पानी आना, सूखापन और दृष्टि संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं. उन्होंने कहा कि मोबाइल और टीवी की तेज रोशनी बच्चों की आंखों की रोशनी को प्रभावित कर सकती है. साथ ही इसका मानसिक प्रभाव भी पड़ता है, जिससे बच्चे चिड़चिड़े हो सकते हैं.
आंखों की सुरक्षा के लिए अपनायें ये उपाय
विशेषज्ञों ने बच्चों और अभिभावकों को कुछ सावधानियां बरतने की सलाह दी है.
- लगातार आधे घंटे से अधिक समय तक मोबाइल या स्क्रीन न देखें।
- हर कुछ देर में आंखों को आराम दें और पलकें झपकाते रहें।
- आंखों को समय-समय पर ठंडे पानी से धोएं।
- पढ़ाई के अलावा मोबाइल पर गेम खेलने का समय सीमित करें।
- बच्चों को आउटडोर खेल और शारीरिक गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित करें।
- आंखों में किसी भी प्रकार की समस्या होने पर चिकित्सक की सलाह लें और डॉक्टर द्वारा सुझाए गए आई ड्रॉप का ही उपयोग करें।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्क्रीन टाइम को नियंत्रित कर, संतुलित दिनचर्या अपनाकर और नियमित नेत्र जांच कराकर बच्चों की आंखों को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है.
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