तेतुलिया वन भूमि घोटाले में बोकारो के पीडीजे अनिल मिश्रा की अदालत ने बुधवार को बड़ा फैसला सुनाया. अदालत ने प्राइवेट कंपनी उमायुष मल्टीकॉम प्राइवेट लिमिटेड को 74 एकड़ जमीन देने का आदेश रद्द कर दिया. अदालत ने माना कि फर्जी दस्तावेज और धोखाधड़ी से आदेश लिया गया था. राजस्व बंदोबस्त पदाधिकारी द्वारा दो मार्च 2022 को कंपनी के पक्ष में आदेश पारित कर दिया गया था. कोर्ट ने जमीन को संरक्षित वन बताते हुए सरकार के हक में फैसला दिया. सीएनटी एक्ट की समय सीमा के बाहर होने पर कंपनी का दावा खारिज हो गया. विवादित भूमि (मौजा तेतुलिया में) कानूनी रूप से संरक्षित वन भूमि है, जिसे ऐतिहासिक रूप से गैर आबाद मालिक जंगल साल के रूप में दर्ज किया गया है. यद्यपि 1962 में कब्जा अस्थायी रूप से बोकारो स्टील प्लांट प्रबंधन को सौंप दिया गया था. लेकिन कानूनी रूप से मालिकाना हक (टाइटल) कभी भी राज्य सरकार/वन विभाग के पास से नहीं गया. इसके अलावा, केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति के बिना भूमि की आधिकारिक प्रकृति को जंगल से पुरातन पतित (पुरानी परती) में बदलना वन (संरक्षण) अधिनियम का सीधा उल्लंघन था. फैसले से जमीन माफियाओं के मंसूबे पर पानी फिर गया है.
Bokaro News : कंपनी को 74 एकड़ जमीन देने का आदेश रद्द
Bokaro News : तेतुलिया वन भूमि घोटाले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया.
