Bokaro News : सीसीएल ढोरी एरिया में जल्द शुरू होगी हाइवॉल माइनिंग

Bokaro News : सीसीएल की ओर से पहली हाइवॉल माइनिंग बेरमो कोयलांचल अंतर्गत ढोरी एरिया में जल्द शुरू की जायेगी. इसको लेकर प्रक्रिया लगभग पूरी कर ली गयी है.

राकेश वर्मा, बेरमो : सीसीएल की ओर से पहली हाइवॉल माइनिंग बेरमो कोयलांचल अंतर्गत ढोरी एरिया में जल्द शुरू की जायेगी. इसको लेकर प्रक्रिया लगभग पूरी कर ली गयी है. सिर्फ डीजीएमएस के परमिशन का इंतजार किया जा रहा है. इसके अलावा इसी अमेंडमेंट के लिए भी अप्लाई किया गया है. प्रबंधन के अनुसार हाइवॉल माइनिंग अंडरग्राउंड माइनिंग है और पहले से इसी ओपन कास्ट का है. इसलिए इसी में संशोधन कर अब ओसी तथा यूजी दोनों माइंस मिला कर फ्रेश इसी की स्वीकृति ली जायेगी. हाइवॉल माइनिंग ढोरी एरिया की एएडीओसीएम परियोजना की अमलो माइंस में शुरू हाेगी और तीन साल में कुल 13 लाख टन कोयले का उत्पादन होगा. हर साल 3.8 लाख टन कोयले का खनन किया जायेगा. पहले साल 3.80 लाख टन और इसके बाद के वर्षो में सालाना पांच-पांच लाख टन कोयला खनन होगा. इस विधि से उत्पादन किये जाने वाले कोयले का साइज माइनस 100 एमएम से भी कम होगा और क्रश होकर फ्रेश कोयला निकलेगा. चालू वित्तीय वर्ष में हाइवॉल

माइनिंग से किया जाना था 3.80 लाख टन उत्पादन

चालू वित्तीय वर्ष में एएओडीसीएम का कोयला उत्पादन लक्ष्य 29.60 लाख टन है. आउटसोर्स से 17.72 लाख टन तथा डिपार्टमेंटल 6.80 लाख टन के अलावा हाइवॉल माइनिंग से 3.80 लाख टन उत्पादन करना था. अभी तक आउटसोर्स से 11.81 लाख टन तथा डिपार्टमेंटल से 5.91 लाख टन कोयला उत्पादन किया गया है. हाइवॉल माइनिंग से चालू वित्तीय वर्ष में उत्पादन शुरू नहीं हो पाया. इसलिए हाइवॉल माइनिंग के लक्ष्य को घटा कर एएओडीसीएम का चालू वित्तीय वर्ष में लक्ष्य 25.80 लाख टन कर दिया गया. लेकिन प्रबंधन हाइवॉल माइनिंग के लक्ष्य 3.80 लाख टन को डिपार्टमेंटल उत्पादन से पूरा करने का प्रयास कर रहा है. अमलो के पीओ राजीव कुमार सिंह ने कहा कि चालू वित्तीय वर्ष के शेष डेढ़ माह में आउटसोर्स से 7.18 लाख तथा डिपार्टमेंटल (हाइवॉल माइनिंग के लक्ष्य को मिला कर) 4.66 लाख टन उत्पादन करना है. निश्चित रूप से परियोजना उत्पादन लक्ष्य को प्राप्त करेगी.

सरफेस को बगैर डिस्टर्ब किये होगी माइनिंग

हाइवॉल माइनिंग से उत्पादित कोयला माइंस से सीधे कन्वेयर बेल्ट में आयेगा और सरफेस में आकर गिरेगा. यहां से टिपर में लोड होकर साइडिंग व वाशरी में ले जाया जायेगा. मालूम हो कि कोल इंडिया में 30 जगह हाइवॉल माइनिंग शुरू होने वाली है. कई जगह शुरू हो चुकी है. इसीएल में दो और सीसीएल में एक जगह शुरू होगा. जानकारी के अनुसार एएडीओसीएम की अमलो माइंस के ऊपरी सतह पर गांव व बस्ती रहने के कारण जगह खाली नहीं हो पा रहा है. साथ ही 100 मीटर के अंदर ब्लास्टिंग किया जाना भी प्रतिबंधित है. ऐसे में बगैर गांव व बस्ती को हटाये यानि सरफेस को बगैर डिस्टर्ब किये अमलो माइंस में हाइवॉल माइनिंग की जायेगी. भूमिगत खदान की गैलरी की तरह माइंस के अंदर प्लेटफार्म बनाया जायेगा, जिस पर हाइवॉल मशीन लगेगी और उत्पादन होगा.

तारमी में तीन मिलियन टन की लगेगी कोकिंग कोल वाशरी

ढोरी एरिया की तारमी प्रोजेक्ट में सालाना तीन लाख टन कोयला फीड की क्षमता वाली एक नयी कोकिंग वाशरी भी लगने जा रही है. प्रबंधकीय सूत्रों के अनुसार इसका वर्क ऑर्डर हो गया है. ढोरी एरिया की एसडीओसीएम, अमलो, तारमी के अलावा कल्याणी एक्सपेंशन प्रोजेक्ट से उत्पादित कोयले को इस वाशरी में फीड किया जायेगा. यहां से वाशरी ग्रेड-5 का कोयला सीएचपी में चला जायेगा और वाशरी ग्रेड-3 का कोयला वाशरी में रह जायेगा. यहां से फिर इसे अन्यत्र जगहों पर भेजा जायेगा. जल्द ही ढोरी एरिया में सालाना दो मिलियन क्षमता की कल्याणी एक्सपेंशन माइंस भी अस्तित्व में आयेगी. यह 20 साल का प्रोजेक्ट है. इसके बाद ढोरी एरिया का कोल प्रोडक्शन का ग्राफ बढ़ जायेगा, जिसको देखते हुए यहां वाशरी व सीएचपी का निर्माण होगा. अमलो में हाइवॉल माइनिंग शुरू करने के लिए डीजीएमएस से परमिशन मिलने का इंतजार है. इसी एमेंडेमेंट जरूरी है. अमलो परियोजना को मॉडल माइन बनाने की योजना है. निलेंदू कुमार सिंह, सीएमडी, सीसीएल

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By Prabhat Khabar News Desk

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