कसमार. कसमार प्रखंड के हिसीम पहाड़ स्थित केदला में रविवार को संयुक्त ग्राम वन प्रबंधन सह संरक्षण समिति की बैठक आयोजित हुई. अध्यक्षता कमलनाथ सोरेन ने की. बैठक में वन पर्यावरण सुरक्षा समिति के केंद्रीय उपाध्यक्ष विष्णु चरण महतो, केंद्रीय सदस्य आनंद महतो, गुमनजारा समिति के अध्यक्ष शंकर टुडू मुख्य रूप से मौजूद थे.
बैठक को संबोधित करते हुए विष्णु चरण महतो ने कहा कि पिछले 35 वर्षों से समिति बनाकर के उत्तरी छोटा लनागपुर स्तर पर वन व पर्यावरण की सुरक्षा का कार्य करते आ रहे हैं. इस बीच करीब 354 समितियों का गठन कर जंगल को हरा-भरा करने में सफलता मिली है, लेकिन कहीं कहीं पर समिति की उदासीनता के कारण जंगल की कटाई फिर से शुरू हो गयी है. उसे हर हाल में रोकना है. कहा कि सरकार ने वनों की सुरक्षा का जिम्मा गांव वालों को दिया है. संयुक्त ग्राम प्रबंधन के तहत विभाग और समिति को आपस में मिल कर जंगल की सुरक्षा करनी है. वनों के उपज का 90% हिस्सा गांव वालों को मिलेगा. शेष 10% ही सरकार लेगी. इसलिए सभी गांव वाले अपने-अपने जंगल की सुरक्षा स्वयं करें, ताकि आने वाले दिन में इसका फायदा मिल सके. आनंद महतो ने कहा कि जंगल की सुरक्षा करना न केवल कर्तव्य है, बल्कि हर दृष्टिकोण से गांव वालों के लिए फायदेमंद भी है. इसलिए जंगल की सुरक्षा में सभी को तन मन से कार्य करने की जरूरत है.काशीनाथ बने अध्यक्ष, छत्रु मांझी उपसचिव
बैठक के दौरान केदला समिति का पुनर्गठन किया गया. इसके तहत काशीनाथ सोरेन सर्वसम्मति से अध्यक्ष, लालदेव हेंब्रम उपाध्यक्ष, छत्रु मांझी उपसचिव चुने गये. इसके अलावा 15 कार्यकारिणी सदस्यों का चयन भी किया गया. जिसमें महिलाओं की भागीदारी भी सुनिश्चित है. बैठक में कालेश्वर मांझी, लखिंदर हेंब्रम, शंकर टुडू, कुलसी देवी, चंपा देवी, सुकुरमनी देवी, विनोती देवी, अंजली देवी, बसंती देवी, कविता कुमारी, राजेश कुमार मुर्मू, बृजेश कुमार मुर्मू, उर्मिला देवी, लालदेव मुर्मू, बेलमनी देवी, सांवती देवी, कार्तिक मांझी, शुरू वाला देवी आदि मौजूद थे.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
