बीएसएल ने स्वदेशी तकनीक से हासिल की बड़ी उपलब्धि, बीएफ-3 में कोल डस्ट इंजेक्शन सिस्टम चालू

बोकारो स्टील प्लांट (बीएसएल) ने स्वदेशी इंजीनियरिंग का परिचय देते हुए ब्लास्ट फर्नेस-3 के लिए कोल डस्ट इंजेक्शन (CDI) न्यूमैटिक कन्वेयिंग सिस्टम सफलतापूर्वक चालू किया है. इस नवाचार से सालाना ₹100 करोड़ की बचत का अनुमान है.

बोकारो स्टील प्लांट (बीएसएल) ने स्वदेशी इंजीनियरिंग क्षमता और तकनीकी नवाचार का उत्कृष्ट उदाहरण पेश करते हुए ब्लास्ट फर्नेस-3 के लिए कोल डस्ट इंजेक्शन (CDI) न्यूमैटिक कन्वेयिंग सिस्टम की सफलतापूर्वक इन-हाउस कमीशनिंग की है. इस प्रणाली के माध्यम से बोकारो पावर सप्लाई कंपनी प्राइवेट लिमिटेड (बीपीएससीएल) से पुल्वराइज्ड कोल को ब्लास्ट फर्नेस-3 तक पहुंचाया जा सकेगा. परियोजना को 15 अगस्त 2026 को अंतिम रूप दिया गया. इससे संयंत्र में ईंधन के अधिक कुशल उपयोग, परिचालन दक्षता बढ़ाने और उत्पादन लागत को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी.

बीएफ-3 में कोल मिलिंग सुविधा नहीं, इसलिए तैयार की गयी नई प्रणाली

परियोजना की शुरुआत ब्लास्ट फर्नेस-4 और 5 की करीब 10 टन प्रति घंटा (टीपीएच) कोल डस्ट जरूरत को पूरा करने के उद्देश्य से की गयी थी. हालांकि, ब्लास्ट फर्नेस-5 के रणनीतिक डीकमीशनिंग के प्रस्ताव के बाद परियोजना को दोबारा डिजाइन कर नवीनीकृत ब्लास्ट फर्नेस-3 के लिए अनुकूलित किया गया. वर्तमान में बीएफ-3 में कोल मिलिंग की सुविधा उपलब्ध नहीं है. ऐसे में बीपीएससीएल से तैयार कोल डस्ट को नियमित और नियंत्रित तरीके से बीएफ-3 तक पहुंचाने के लिए यह प्रणाली विकसित की गयी.

650 मीटर लंबी पाइपलाइन से पहुंचेगा कोल डस्ट

परियोजना के तहत बीपीएससीएल के कोल हैंडलिंग प्लांट में सड़क मार्ग से कोयले की आपूर्ति के लिए डम्पर रैंप बनाया गया. मौजूदा कन्वेयर सिस्टम में भी आवश्यक संशोधन और उन्नयन किया गया. प्रणाली में 1.4 घन मीटर क्षमता वाले दो ब्लो टैंक स्थापित किये गये हैं, जो सात चरणों वाले स्वचालित चक्र के माध्यम से कोल डस्ट की निरंतर और नियंत्रित आपूर्ति करते हैं.

इस परियोजना की प्रमुख इंजीनियरिंग चुनौती करीब 650 मीटर लंबी डीएन-250 पाइपलाइन के जरिये पुल्वराइज्ड कोल को बीएफ-3 तक पहुंचाना था. इसके लिए नाइट्रोजन के उच्च वेग और कोल डस्ट की मात्रा के बीच संतुलन स्थापित किया गया, ताकि पाइपलाइन में कोल डस्ट के जमाव और अवरोध की संभावना कम हो. ब्लास्ट फर्नेस-3 में पहुंचने के बाद कोल डस्ट को 24-वे स्प्लिट के जरिये विभिन्न ट्यूयर्स तक नियंत्रित और समान रूप से पहुंचाया जा रहा है.

परीक्षण में 15 टीपीएच की सैद्धांतिक क्षमता

15 अगस्त को किये गये कमीशनिंग परीक्षण में प्रणाली ने निर्धारित 10 टीपीएच क्षमता के मुकाबले करीब 15 टीपीएच की सैद्धांतिक कन्वेइंग क्षमता प्रदर्शित की. हालांकि, वर्तमान वास्तविक क्षमता बीपीएससीएल की बॉल मिल की उत्पादन क्षमता पर निर्भर करेगी.

प्रणाली को पीएलसी आधारित स्वचालित संचालन, दो चरणों वाली नाइट्रोजन प्रेशर रेगुलेशन और पर्जिंग सिस्टम जैसी आधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया है. इससे संचालन में सटीकता और विश्वसनीयता बढ़ने के साथ पाइपलाइन में अवरोध की संभावना भी कम होगी.

कोक की खपत घटेगी, सालाना 100 करोड़ की बचत का अनुमान

परियोजना से होने वाला आर्थिक लाभ भी महत्वपूर्ण है. 0.85 के कोक रिप्लेसमेंट रेशियो के आधार पर कोक के स्थान पर पुल्वराइज्ड कोल का उपयोग किया जा सकेगा. इससे कोकिंग कोल पर होने वाले खर्च में करीब 100 करोड़ रुपये सालाना की संभावित बचत का अनुमान है. इससे बीएसएल की ईंधन अर्थव्यवस्था बेहतर होने के साथ उत्पादन लागत को नियंत्रित करने और लागत-प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत करने में मदद मिलेगी.

चार माह में पूरी हुई परियोजना

इस परियोजना की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि यह है कि अवधारणा तैयार करने से लेकर कमीशनिंग तक का पूरा कार्य महज चार माह में पूरा किया गया. इस दौरान इंजीनियरिंग, पाइपलाइन, विद्युत, ऑटोमेशन और अन्य तकनीकी कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा किया गया. यह बीएसएल टीम की तकनीकी दक्षता, बेहतर समन्वय और टीम भावना को दर्शाता है.

परियोजना का निष्पादन बीएसएल के निदेशक प्रभारी एवं अधिशासी निदेशक (संकार्य) के मार्गदर्शन और मुख्य महाप्रबंधक (उपयोगिताएं) के नेतृत्व में किया गया. पाइपलाइन, इरेक्शन, विद्युत और ऑटोमेशन से जुड़े कार्यों में विभिन्न अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया. यह उपलब्धि बीएसएल की स्वदेशी तकनीकी क्षमता और नवाचार को परिचालन व आर्थिक लाभ में बदलने का महत्वपूर्ण उदाहरण है.


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By Sunil kumar tiwari

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