Bokaro News : पुस्तक मेले में दिखा साहित्य, शिक्षा व कला का अनूठा संगम
Bokaro News : शिबू सोरेन स्मृति भवन कैंप दो में दो दिवसीय शब्द सरिता महोत्सव पुस्तक मेला शुरू, दर्जनों प्रकाशन ने लिया हिस्सा, किताबों की हुई बिक्री.
बोकारो, 25 साल आयु वर्ग का एक ग्रुप आपस में चर्चा करते हुए जा रहा था, चलो ना एक किताब ले लेते हैं. एक उपन्यास लेना है, सुधा-चंदर की कहानी फिर से पढ़ लेंगे. तब ही एक युवा ने उत्साह के साथ कहा कि चलो ना भारतीय राजनीति के उत्तरायण संबंधित एक किताब भी ले लेंगे…. कैंप दो से गुजरने वाली हर कदम बुधवार को शिबू सोरेन स्मृति भवन (टाउन हॉल) की ओर स्वत: बढ़ रही थी. कैंप टू स्थित शिबू सोरेन स्मृति भवन (टाउन हॉल) में दो दिवसीय शब्द सरिता महोत्सव पुस्तक मेला की शुरुआत हुई. साहित्य, शिक्षा, कला व संवाद का अनूठा संगम देखने को मिला, जिसने बोकारो को साहित्यिक मानचित्र पर नयी पहचान दिलाने की दिशा में एक मजबूत पहल की. विभिन्न राज्यों से आये प्रतिष्ठित लेखक, कवि, शिक्षाविद, प्रकाशक व साहित्य प्रेमियों की उपस्थिति ने महोत्सव की गरिमा को और भी बढ़ा दिया. लोगों ने ज्ञान के महासागर में डुबकी लगायी.
महोत्सव की शुरुआत बोकारो विधायक श्वेता सिंह, उपायुक्त अजय नाथ झा, उप विकास आयुक्त शताब्दी मजूमदार, डीपीएलआर मेनका, अपर समाहर्ता मुमताज अंसारी, चास एसडीओ प्रांजल ढांडा, डीसीएलआर प्रभाष दत्ता, बेरमो एसडीओ मुकेश मछुआ, सीटी डीएसपी आलोक रंजन ने दीप प्रज्वलित कर संयुक्त रूप से किया.पुस्तक बदल सकती है जीवन की दिशा व दशा : विधायक
विधायक श्वेता सिंह ने कहा कि पुस्तक से अधिक सुंदर, सच्चा व स्थायी मार्गदर्शक कोई नहीं हो सकता. उन्होंने कहा कि पुस्तक ना केवल जानकारी देती हैं, बल्कि जीवन की दिशा व दशा बदलने की क्षमता भी रखती है. उन्होंने कहा कि पढ़ने की आदत व्यक्ति को आत्मनिर्भर, संवेदनशील व दूरदर्शी बनाती है, जो समाज निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.बोकारो की पहचान केवल स्टील सिटी तक सीमित ना रहे : उपायुक्त
उपायुक्त श्री ने कहा कि बोकारो की पहचान केवल स्टील सिटी के रूप में नहीं, बल्कि एक वाइब्रेंट शहर के रूप में होनी चाहिए. यहां की कृषि परंपरा, समृद्ध आदिवासी संस्कृति, बच्चों की प्रतिभा व साहित्यिक चेतना बोकारो को विशिष्ट बनाती है. शब्द सरिता महोत्सव जैसे आयोजन बोकारो की बहुआयामी पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने में सहायक सिद्ध होंगे.मानसिक व बौद्धिक विकास के लिए पुस्तक पढ़ना जरूरी
उपायुक्त ने कहा कि मानसिक विकास, रचनात्मक सोच व सकारात्मक दृष्टिकोण के लिए पुस्तक पढ़ना आवश्यक है. जो लोग नियमित रूप से पढ़ते हैं, उन्होंने पढ़ाई में ही मनोरंजन खोज लिया है. डीसी ने युवा वर्ग व शिक्षकों से अपील किया कि वे हमेशा अपने हाथ में एक पुस्तक रखें. समय मिलते ही पढ़ाई करें. इस प्रकार की आदत समाज में पढ़ने की संस्कृति को मजबूत करती है. आने वाली पीढ़ी को प्रेरित करती है. डीडीसी ने कहा कि शब्द सरिता महोत्सव केवल एक साहित्य उत्सव नहीं, बल्कि सांस्कृतिक प्रदर्शन, क्षेत्रीय नृत्य-संगीत, कला एवं संवाद का एक वाइब्रेंट प्लेटफॉर्म है. उन्होंने क्रमवार 02 दिवसीय महोत्सव की रूप रेखा – कार्यक्रमों की जानकारी दी.मेरे गांव का टूटता पहाड़ रो रहा है : निलोत्पल मृणाल
युवा कवि साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता नीलोत्पल मृणाल ने अरावली पर्वत को लेकर हालिया विरोध, झारखंड में बालू और पत्थर की हो रही खेल कविता के जरिये कटाक्ष किया. अरे मोरनी का पायल है शिकारी कोई लूट गया, बिरसा का तीर और कमान रो रहा है, नदी नाला जंगल और झाड़ रो रहा है, मेरे गांव का टूटता पहाड़ रो रहा है का पाठ किया. डार्क हॉर्स, औघड़ व यार जादूगर जैसी बेस्ट सेलर पुस्तकों के रचयिता नीलोत्पल मृणाल ने कहां गया हाय मेरा दिन वो सलोना रे, हाथों में थाम रे माटी का खिलौना रे, अरे वही मेरा चांदी था, वही मेरा सोना रे… कह कर बचपन की याद दिलायी, तो सभी भावुक हो उठे. स्वत:स्फूर्त तालियों की महफिल हो गयी.देशभर की साहित्यिक विभूतियों की है सहभागिता
महोत्सव में देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रतिष्ठित लेखक, कवि, शिक्षाविद, प्रकाशक व साहित्य प्रेमी शामिल हुए. साहित्यिक सत्र, काव्य पाठ, संवाद कार्यक्रम, पुस्तक प्रदर्शनी व सांस्कृतिक प्रस्तुतियां हुई. शिक्षाविद् सह एकलव्य संस्था के संस्थापक मोहम्मद यासिर, प्रसिद्ध कथा लेखक शिवनारायण गौर, संथाली लेखक सह विश्वभारती विश्वविद्यालय के प्रोफेसर धनेश्वर मांझी, शिक्षाविद व प्रकाशक डॉ शकुंतला मिश्रा, लेखक डॉ विनोद खोरठा, रांची विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ विनय भारत, लेखक व समाजसेवी डॉ साजिद हुसैन, वॉकिंग बुक फेयर के संस्थापक अक्षय, मानवविज्ञान के सहायक प्राध्यापक डॉ अभय मिंज, रूम टू रीड के राज्य प्रमुख सूरज कुमार, कवयित्री पद्मिनी शर्मा व रामायण आधारित काव्य रचनाओं से संबंधित लेखक मौजूद रहे. प्रोफेसर सह लेखक विनय भारत व सहायक प्रोफेसर डॉ अभय मिंज ने भगवद्गीता समेत महान व्यक्तियों की जीवनी आधारित पुस्तकों को बच्चों के लिए उपयोगी बताया. डॉ विनोद कुमार ने कहा कि खोरठा केवल एक भाषा नहीं, बल्कि पीढ़ियों की स्मृति और अस्मिता का प्रतीक है. संथाली शब्दकोश का निर्माण किया गया है, जो क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है.सोशल मीडिया से बच्चों पर पड़ने वाले प्रभाव को दर्शाया
शब्द सरिता महोत्सव में स्वांग मध्य विद्यालय के विद्यार्थियों ने व्हाट्सएप, गूगल, इंस्टाग्राम सहित अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से बच्चों के जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव विषय पर नाटक का मंचन किया. विद्यार्थियों को स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया.
प्रतिष्ठित प्रकाशकों की सहभागिता
एकलव्य, रूम टू रीड, पीरामल फाउंडेशन, प्रथम बुक्स, झारखंड झरोखा, विजय पब्लिकेशन, प्रकाशन संस्थान, बुक फाइंड व प्रभात बुक्स जैसे प्रमुख प्रकाशक पुस्तक मेला में हिस्सा लिया. प्रकाशक नवीनतम पुस्तकों, बाल साहित्य, शोध कार्यों व साहित्यिक सामग्री के साथ पाठकों से संवाद स्थापित किया.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
