निविदा के पूर्व शिलान्यास सिर्फ बिल्डरों को फायदा पहुंचाने की कोशिश तो नहीं ?

चास: चास नगर निगम की ओर से क्षेत्र में कई स्थानों पर पुल, सड़क व डीप बोरिंग का शिलान्यास निविदा निकालने से पूर्व ही किया जा रहा है. इसका फायदा जनता को कितना मिलेगा, यह तो आने वाला समय ही बतायेगा, हालांकि फिलवक्त इसका फायदा इलाके के बिल्डरों को जबरदस्त मिल रहा है. जमीन की […]

चास: चास नगर निगम की ओर से क्षेत्र में कई स्थानों पर पुल, सड़क व डीप बोरिंग का शिलान्यास निविदा निकालने से पूर्व ही किया जा रहा है. इसका फायदा जनता को कितना मिलेगा, यह तो आने वाला समय ही बतायेगा, हालांकि फिलवक्त इसका फायदा इलाके के बिल्डरों को जबरदस्त मिल रहा है. जमीन की कीमतें बढ़ गयी हैं और रियल स्टेट के कारोबार ने भी छलांग लगायी है.

इधर शिलान्यास के कई महीने बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं होने से जमीन में पैसा लगाने वाले लोग खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं. इतना ही नहीं परसाबेड़ा में पुल निर्माण व मां मथुरासिनी मंदिर तक सड़क निर्माण के लिए हुए शिलान्यास की जानकारी निगम के कार्यपालक पदाधिकारी को भी नहीं है. आलम यह है कि शिलान्यास पट्ट पर स्थानीय वार्ड पार्षद का नाम तो है, लेकिन उन्हें शिलान्यास की जानकारी नहीं है. वार्ड पार्षदों का कहना है कि निगम के उच्च अधिकारी लोगों को भ्रमित करने के लिए शिलान्यास कर रहे हैं.

बिल्डरों को लाभ दिलाने के लिए किया गया शिलान्यास : स्थानीय लोगों व कई पार्षदों ने आरोप लगाया है कि चीराचास व परसाबेड़ा गांव के बीच आधा दर्जन से अधिक बिल्डर काम कर रहे हैं, लेकिन बोकारो जाने के लिए कोई मार्ग नहीं होने के कारण बिल्डरों को खरीदार नहीं मिल पा रहा था. इसको देखते हुए उन्हें लाभ पहुंचाने के लिए गरगा नदी पर पुल निर्माण का पांच मार्च 2017 को शिलान्यास करा दिया गया. शिलान्यास होते ही लोगों का ध्यान इस क्षेत्र की आेर गया.

केस स्टडी – एक

नौ माह पूर्व चीराचास वास्तुविहार फेज-1 के पास गरगा नदी पर पुल निर्माण का शिलान्यास पांच मार्च 2017 को किया था, लेकिन अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ. शिलान्यास स्थल से कुछ ही दूरी पर मुख्यमंत्री सेतु योजना के तहत गरगा नदी पर पुल निर्माण का स्वीकृति मिली है. इस पुल का निर्माण तीन करोड़ 78 लाख 85 हजार 522 रुपये की लागत से होना है. इसके अलावा शिलान्यास स्थल से कुछ ही दूरी पर पांडेय पुल भी मौजूद है, जो कि सीधे भर्रा से सेक्टर छह को जोड़ता है. नगर निगम के पास इतनी बड़ी राशि से पुल निर्माण का कोई भी फंड मौजूद नहीं है. निगम ने क्षेत्र के आधा दर्जन मुख्य पथों को कालीकृत करने के लिए नगर विकास विभाग से 14वें वित्त आयोग की राशि से कराने की अनुमति मांगी है. इसमें गरगा पर पुल निर्माण का कहीं भी उल्लेख नहीं किया गया है.

केस स्टडी – दो

वार्ड 17 स्थित मुख्य पथ से मां मथुरासिनी मंदिर तक 700 फुट पीसीसी सड़क व एक डीप बोरिंग का शिलान्यास 20 मार्च 2017 को किया गया था, लेकिन अब तक काम शुरू नहीं किया गया. निविदा निकालने से पूर्व ही शिलान्यास कर दिया गया. स्थानीय लोगों ने बताया कि सड़क नहीं होने से आसपास के दर्जनों लोग घर नहीं बना रहे हैं. कई लोगों ने जमीन खरीदकर बाउंड्री कर रखी है.

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