विडंबना: धनतेरस पर धन के लिए तरस गया कोल इंडिया का ठेका मजदूर, संगठित को 57 हजार असंगठित को शून्य

बेरमो: दुर्गापूजा बीत गयी, दिवाली भी जा रही है. इस दौरान कोल इंडिया के मजदूरों को 57 हजार बोनस तथा 51 हजार एरियर (कुल एक लाख आठ हजार) मिले, पर इन ठेका मजदूरों की झोली में एक्ट में संशोधन के प्रस्ताव के झुनझुने के अलावे कुछ नहीं. बोनस एक्ट में संशोधन के अनुसार कोल इंडिया […]

बेरमो: दुर्गापूजा बीत गयी, दिवाली भी जा रही है. इस दौरान कोल इंडिया के मजदूरों को 57 हजार बोनस तथा 51 हजार एरियर (कुल एक लाख आठ हजार) मिले, पर इन ठेका मजदूरों की झोली में एक्ट में संशोधन के प्रस्ताव के झुनझुने के अलावे कुछ नहीं. बोनस एक्ट में संशोधन के अनुसार कोल इंडिया के आउटसोर्स में कार्यरत ठेका मजदूरों को सात हजार से 21 हजार रु मिलना था. कोल इंडिया में कुल 3.27 लाख तथा सीसीएल में 57 हजार ठेका मजदूर कार्यरत हैं. धनतेरस के मौके पर ये ठेका मजदूर धन के लिए तरस रहे हैं.

हमेशा की तरह ठगे गये : कोल इंडिया के आउटसोर्स में कार्यरत ठेका मजदूर कोयला उद्योग की रीढ़ हैं. कोल इंडिया के उत्पादन का 70 प्रतिशत 1.75 लाख ठेका मजदूर करते हैं, वहीं 3.27 लाख मजदूर तीस प्रतिशत. हमेशा की तरह ये ठेका मजदूर एक बार फिर ठगे गये. बोनस को लेकर हुए समझौता में कोल इंडिया प्रबंधन व मजदूर संगठन से जुड़े नेताओं के बीच ठेका मजदूरों के बैंक खाते में न्यूनतम सात हजार रुपये से लेकर अधिकतम 12 हजार रुपये भेजे जाने पर सहमति बनी थी. पिछले चार साल से बोनस की बैठक में कोयला मजदूरों के साथ-साथ ठेका मजदूरों के बोनस पर भी प्रबंधन व यूनियन नेता सहमति जताते हैं, लेकिन ठेका मजदूरों को बोनस कभी नहीं मिला.
बोनस एक्ट में हुआ संशोधन : केंद्र सरकार ने कैबिनेट में बोनस एक्ट 1965 में संशोधन का प्रस्ताव पास कर दिया है. राष्ट्रपति के अनुमोदन के बाद यह देश के सार्वजनिक प्रतिष्ठानों में लागू हो जायेगा. संशोधन प्रस्ताव में अब बोनस के लिए 10 हजार रुपये वेतन की सीलिंग बढ़ाकर 21 हजार रुपये कर दिया गया है. पूर्व में 10 हजार रुपये वेतन पानेवाले को मात्र तीन हजार रुपये सालाना बोनस मिला करता था. अब 21 हजार की सीलिंग कर दिये जाने से मजदूरों को बोनस की न्यूनतम राशि सात हजार रुपये होगी. नये प्रस्ताव में सीलिंग के कारण ढेरों मजदूर बोनस के दायरे में आ जायेंगे.
किसी भी इकाई में नहीं होता पालन : अभी आउटसोर्स के ठेका मजदूरों को कई कंपनियों में हाई पावर कमेटी की अनुशंसा के तहत 13 हजार रुपये तक प्रतिमाह वेतन दिया जा रहा है.

ऐसे में उक्त मजदूर बोनस एक्ट के नये प्रस्ताव के तहत 21 हजार सीलिंग के दायरे में आ जायेंगे. इसके बाद मजदूरों को 55 सौ के बजाय सात हजार रुपये तक सालाना बोनस (एक्सग्रेशिया) मिल सकता है. इसका पालन कोल इंडिया की इकाई में कायदे से नहीं हो रहा है.
आदेश की उड़ रहीं धज्जियां
कोल इंडिया के जीएम (पर्सनल) एके सक्सेना ने बोनस को लेकर कोल इंडिया की सभी कंपनियों को पत्र लिखा है. ठेका मजदूरों के बोनस भुगतान को सुनिश्चित करने को कहा गया था. इस पत्र के आलोक में सभी कंपनी प्रबंधन ने ठेका मजदूरों को बोनस देने को लेकर सभी एरिया प्रबंधन को पत्र लिखा. एरिया व परियोजना प्रबंधन ने भी संबंधित ट्रांसपोर्टर व ठेकेदारों को जरूरी निर्देश दिया. भुगतान को लेकर ट्रेड यूनियन नेताओं को कोल इंडिया प्रबंधन ने आश्वस्त किया था. हाई पावर कमेटी के निर्णय के अनुसार इसकी जिम्मेवारी सभी कंपनियों के महाप्रबंधक को दी गयी है.
प्रबंधन के पास सही आंकड़ा नहीं
कोयला उद्योग में फिलहाल आउटसोर्स में कार्यरत ठेका मजदूरों की संख्या 1.75 लाख के करीब है. सीसीएल में इनकी संख्या 22 हजार है, लेकिन कोल इंडिया प्रबंधन के पास ठेका मजदूरों का कोई सही आंकड़ा नहीं है. प्रबंधन का कहना है कि उसके पास 42 हजार सूचीबद्ध ठेका मजदूरों की संख्या है, जबकि ट्रेड यूनियन इसकी संख्या लाखों में बताती है. एटक नेता लखनलाल महतो कहते हैं कि कुछ आउटसोर्स कंपनियों द्वारा बोनस भुगतान देने की सूचना है, लेकिन बोनस कितना दिया गया है, पता नहीं.
असंगठित मजदूरों की उपेक्षा
एचएमएस से संबद्ध राकोमयू के बीएंडके एरिया सचिव गजेंद्र प्रसाद सिंह कहते हैं कि कोल इंडिया में कार्यरत असंगठित मजदूरों के साथ एक बार फिर प्रबंधन ने धोखा किया है. दुर्गा पूजा में ठेका मजदूरों को भी न्यूनतम सात हजार रुपये बोनस देने पर प्रबंधन व यूनियन नेताओं ने सहमति जतायी थी, लेकिन अभी तक ठेका मजदूरों को एक रुपया भी नसीब नहीं हुआ है.

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