मंगलयान की टीम में झारखंड का लाल

संदीप सावर्ण जमशेदपुर:भारत ने इतिहास रच दिया है. अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में भारत ने लंबी छलांग लगायी है. भारत का मंगल अभियान सफल हो गया. मंगलयान को तैयार करने वाली टीम में सिदगोड़ा 10 नंबर बस्ती का मुकुंद ठाकुर भी शामिल है. मुकुंद मंगलयान के सिस्टम इंटीग्रिशन ग्रुप का सदस्य है. पांच लोगों की […]

संदीप सावर्ण

जमशेदपुर:भारत ने इतिहास रच दिया है. अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में भारत ने लंबी छलांग लगायी है. भारत का मंगल अभियान सफल हो गया. मंगलयान को तैयार करने वाली टीम में सिदगोड़ा 10 नंबर बस्ती का मुकुंद ठाकुर भी शामिल है. मुकुंद मंगलयान के सिस्टम इंटीग्रिशन ग्रुप का सदस्य है. पांच लोगों की इस टीम का मुख्य काम सेटेलाइट कंपोनेंट की स्टडी करना, रॉकेट बनाने से पूर्व टेस्टिंग करना और उसके सफल प्रक्षेपण तक धरातल पर आने वाली तकनीकी खराबी दूर करना था. मंगलयान को तैयार करने में करीब डेढ़ साल का वक्त लगा. मुकुंद का यह पहला फुल टाइम प्रोजेक्ट था, जिस पर उन्होंने काम किया और देश को गर्व करने का एक मौका दिया.

इसरो की खातिर छोड़ी मल्टीनेशनल कंपनियों की नौकरी

मुकुंद ने प्रभात खबर से बात करते हुए अपने जीवन से जुड़ी कई अहम जानकारियां साझा कीं. उन्होंने कहा कि बीटेक करने के दौरान कैंपस सेलेक्शन हुआ था. तीन-तीन मल्टीनेशनल कंपनियों से जॉब के ऑफर मिले. लेकिन दिल में भारत के लिए कुछ करने की बचपन से ही इच्छा थी. इसलिए सारी नौकरियों का ऑफर छोड़ 2010 में इसरो ज्वाइन किया.

24-24 घंटे किया था काम

मंगल ग्रह पर मंगल यान को भेजने के लिए इसरो की पूरी टीम लगी हुई थी. मुकुंद के अनुसार जिस वक्त मंगल यान को तैयार किया जा रहा था, वह सबसे ज्यादा पीक आवर था. इसी वजह से टीम ने कई दिनों तक 24-24 घंटे तक टेस्टिंग करते हुए बिताया है. इसरो इस अभियान को लेकर किसी प्रकार का रिस्क लेना नहीं चाह रही थी. इसी वजह से छोटी से छोटी चीजों को परफेक्ट बनाने को लेकर हर स्तर पर मेहनत करवायी जाती थी.

मंगलयान है पहला प्रोजेक्ट

मुकुंद ने जिस वक्त ज्वाइन किया था, उस वक्त आरआइएसएटी-1 के प्रक्षेपण की तैयारी की जा रही थी. ट्रेनिंग लेने के बाद उसे आरआइएसएटी-1 का भी आंशिक रूप से हिस्सा बनने का मौका मिला, लेकिन मंगलयान की प्लानिंग तैयार होने से लेकर उसके सफल प्रक्षेपण तक वह पूर्णत: शामिल रहा.

मोदी जी ने नहीं मिल पाया, लेकिन जिंदगी का सबसे खुशी भरा दिन

मुकुंद ने कहा कि जिस समय पूरे भारत का सपना साकार हो रहा था, उस वक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इसरो पहुंचे थे. हर कोई उनसे मिल रहा था, लेकिन वह मोदी जी से नहीं मिल पाया, क्योंकि उस वक्त यान के सफल प्रक्षेपण को लेकर इंटरनल काफी तैयारी चल रही थी और वह इसी में शामिल था. उसने कहा कि आज उसके जीवन का सबसे बड़ा दिन है. इसके साथ ही मुकुंद ने कहा कि आज वह जो कुछ भी है, वह मम्मी-पापा की वजह से ही है.

बेटे ने किया है गौरवान्वित

पिता श्रीराम ठाकुर ने कहा कि मुकुंद अब देश के काम आ रहा है. लोग जब उसके बारे में अच्छी बातें करते हैं, तो सिर गौरव से ऊंचा हो जाता है. मुकुंद ठाकुर सिदगोड़ा दस नंबर बस्ती के पदमा रोड निवासी हैं. स्कूली शिक्षा जवाहर नवोदय विद्यालय से पूरी की. 2004 में को-ऑपरेटिव कॉलेज से 12वीं पास की. जलपाईगुड़ी से बीटेक किया. पिता श्रीराम ठाकुर टिनप्लेट में सिक्यूरिटी डिपार्टमेंट में कर्मचारी हैं. मां मृदुला देवी गृहिणी हैं.

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