मंत्रियों ने बदले नियम

रांची: खरीफ मौसम में प्रमाणित हाइब्रिड बीज का वितरण पुराने नियम के आधार पर ही होगा. विभाग द्वारा तैयार प्रस्ताव को मंत्री ने अस्वीकार कर दिया. विभाग चाहता था कि किसान अपनी सुविधा के हिसाब से कहीं से बीज खरीद लें. बीज खरीद की रसीद देने पर उनको प्रति किलो 50 रुपये की दर से […]

रांची: खरीफ मौसम में प्रमाणित हाइब्रिड बीज का वितरण पुराने नियम के आधार पर ही होगा. विभाग द्वारा तैयार प्रस्ताव को मंत्री ने अस्वीकार कर दिया. विभाग चाहता था कि किसान अपनी सुविधा के हिसाब से कहीं से बीज खरीद लें. बीज खरीद की रसीद देने पर उनको प्रति किलो 50 रुपये की दर से अनुदान दिया जायेगा. किसान अपने नजदीकी कृषि कार्यालय से अनुदान ले सकते हैं. इसमें किसानों को यह छूट थी कि वह किसी भी कंपनी का बीज खरीद सकेंगे. विभाग का प्रस्ताव मंत्री के पास गया तो उन्होंने पुरानी प्रक्रिया की जानकारी ली. बताया गया कि अधिसूचित हाइब्रिड सीड कौन सी कंपनी देगी, यह विभाग तय करता है. विभाग द्वारा सूचीबद्ध कंपनी से खरीदे गये हाइब्रिड धान पर ही अनुदान मान्य होगा.

छह किलो ही मिलेंगे
किसान को अधिकतम छह किलो अधिसूचित हाइब्रिड धान ही अनुदानित दर पर दिया जा सकता है. केंद्र सरकार के आदेश के बाद विभाग ने यह तय किया है. राज्य में चार हजार क्विंटल प्रमाणित हाइब्रिड मक्का और 60 एमटी प्रमाणित हाइब्रिड बाजरा की डिमांड विभिन्न कंपनियों से की गयी है.

125 करोड़ से अधिक के बीज की मांग
कृषि विभाग ने करीब दो दर्जन कंपनियों को अधिसूचित हाइब्रिड धान राज्य को उपलब्ध कराने को कहा है. 250 रुपये प्रति किलो के आसपास की कीमत से धान बीज उपलब्ध कराया जाना है. विभाग ने 50 हजार क्विंटल धान बीज, चार हजार क्विंटल मक्का तथा 60 टन ज्वार का अधिसूचित हाइब्रिड बीज उपलब्ध कराने को कहा है.

किसानों को छूट का था आदेश
पूर्व मुख्य सचिव अशोक कुमार सिंह ने 3.12.2010 को भी किसानों को अपनी सुविधा से खरीदने का आदेश विभाग को दिया था. 2010 में हुई आलू बीज खरीद में गड़बड़ी के बाद ऐसा आदेश दिया गया था. इसे तत्कालीन मुख्यमंत्री अजरुन मुंडा ने भी अनुमोदित किया था.

पहले भी होता रहा है ऐसा
विभाग ने तय किया है कि पुरानी विधि से ही किसानों को बीज उपलब्ध कराया जाये. नोटिफाइड हाइब्रिड आपूर्ति के लिए विभाग ने करीब दो दर्जन एजेंसियों को सूचीबद्ध किया है. इनके यहां से बीज खरीदनेवाले किसानों को अनुदान का लाभ दिया जायेगा. ऐसा पहले भी होता रहा है.

डॉ केडीपी साहु, कृषि निदेशक

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